लद्दाख सीमा पर जब तक चीनी सेना पीछे नहीं हटती, भारतीय सैनिक भी पीछे कदम नहीं रखेंगे



लद्दाख सीमा पर बातचीत के बीच चीन कोई मनमानी न कर पाए इसके लिए भारतीय सेना पूरी तैयार है। सीमा विवाद को सुलझाने के लिए अधिकारियों की बैठकों का दौर जारी है लेकिन इस बीच भारत-चीन पर आंख मूंद कर भरोसा नहीं कर रहा है। भारत ने चीन को दो टूक जवाब दिया है कि जबतक एलएसी के करीब आए उसके सैनिकों को नहीं हटाया जाता, तबतक भारतीय सैनिक भी पीछे नहीं हटेंगे।

आर्मी यूनिट और एयरफोर्स तीन सेक्टर्स में पूरी तरह तैयार हैं। ये तीनों सेक्टर 3,488 किलोमीटर में फैली लाइन ऑफ ऐक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) में आते हैं। इसमें वेस्टर्न (लद्दाख), मिडिल (उत्तराखंड, हिमाचल), ईस्टर्न (सिक्किम, अरुणाचल) शामिल हैं। इस बीच बातचीत और सीमा पर चीनी सैनिकों की हलचल पर पूरी नजर है। इन बातों पर भी नजर है कि चीन किसी नए इलाके पर अपना हक जताने की कोशिश न करने लगे।

सेना की तैयारी पर बात करते हुए एक सूत्र ने बताया कि लद्दाख से अरुणाचल प्रदेश तक हमारे सैनिक ऐसे ही तैयार रहेंगे, यह स्थिति तबतक ऐसी रहेगी जबतक चीन एलएसी के पास आए अपनी सेना को हटा नहीं लेता। भारतीय सेना किस तरह आगे बढ़ी है इसका एक उदाहण देखिए। जैसे 33 क्रॉप्स के जो जवान ईस्टर्न सेक्टर में तैनात थे, उन्होंने अपनी यूनिट को 17 (गंगटौक), 27 (कलिपॉन्ग) और 20 (बिनागुरी) पहाड़ श्रंखलाओं में आगे भेज दिया है। हर यूनिट में 10 से 12 हजार तक जवान हैं। यह सब लद्दाख में शुरू हुई चीनी गतिविधियों के बाद ही किया गया है।

वहां चीन ने पैंगोंग सो झील, ग्वालन घाटी क्षेत्र ने सैन्य गतिविधियां तेज की थीं। इससे पहले नाकू ला (सिक्किम) में भी ऐसा किया गया था। इसके बाद भारतीय सेना ने भी लेह में तैनात बटालियन की मदद को अतिरिक्त जवान भेजे थे। पिछले महीने यह खबर आई थी कि भारत ने पैदल सैनिकों की 3 डिविजन वहां भेजी हैं। इनके साथ अर्टलरी गन और कुछ भारी हथियार सिस्टम भी शामिल थे। लेकिन इसके बाद चीन के तेवर थोड़े ढीले पड़ गए और बातचीत का दौर जारी है, जिसका जल्द समाधान निकल सकता है।
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