ओपेक देशों द्वारा कटौती की वजह से तेल की क़ीमतों में उछाल



पेट्रोल और डीज़ल की क़ीमतों में लगातार वृद्धि के अनुमान लगाए जा रहे हैं। चीन, अमेरिका के बाद भारत तीसरा बड़ा तेल आयातक देश है, जिसे कच्चे तेल क़ीमतों में वृद्धि की मार झेलनी पड़ रही है।  तेल उत्पादक देशों के संगठन 'ओपेक' के सदस्य देश  सऊदी  अरब और रूस की सहमति से गत अप्रैल माह में 97 लाख बैरल प्रतिदिन की कटौती किए जाने का फ़ैसला लिया गया था । अब यह कटौती  जुलाई के अंत तक जारी रहेगी, जिसे एतिहासिक माना जा रहा है। इससे ऊर्जा बाजार में लॉकडाउन की वजह से  गत 80 दिनों से जारी नरमी में तेजी आ गई है।

ओपेक में तेल उत्पादक तेरह देशों के संगठन ने एक मत से यह स्वीकार कर लिया है कि वे अपने निर्धारित कोटे के अनुसार कच्चे तेल की ड्रिलिंग काम करेंगे। ओपेक देशों के इतर मेक्सिको ही एक मात्र ऐसा देश है जो घरेलू समस्याओं के कारण एक लाख बैरल कच्चे तेल की कटौती कर पाने में असमर्थता व्यक्त कर रहा है। जुलाई के पश्चात दिसम्बर तक तेल में कटौती धीरे-धीरे 77 लाख बैरल प्रतिदिन करने का लक्ष्य रखा गया है।ओपेक देशों के तेल मंत्री कोरोना संकट तक वीडियो काँफ्रेंसिंग के ज़रिए सलाह-मसवरा करते रहेंगे।

आज ब्रेंट क्रूड की क़ीमतों में 1.02 डालर अर्थात 2.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इससे कच्चे तेल की क़ीमतें व्यापारिक ढंग से 43.32  डालर प्रति बैरल हो गई हैं।  अमेरिका में तेल की क़ीमतों में 83 सेंट यानी 2.1 प्रतिशत की वृद्धि से अब यह 40.38  डालर प्रति बैरल हो गई हैं।  पिछले अप्रैल के बाद कच्चे तेल की ड्रिलिंग में कमी लाए जाने के बाद ब्रेंट की क़ीमतों में दोग़ुना वृद्धि हुई है। 
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