कभी ढाई रूपए के लिए छोड़नी पड़ गई थी पढ़ाई, आज गांव के विकास के लिए पैसे खर्च करते हैं ‘द ग्रेट खली’


मंजिल उनको मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है ।
पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है ।।
जी हां, ये लाइनें जिस किसी ने भी लिखी होगी, बहुत खूब लिखा है। ये कहावत ‘द ग्रेट खली’ के लिए बिल्कुल फिट बैठती है। आज खली किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। खली को अब ना सिर्फ भारत बल्कि पूरा विश्व जानता है। द ग्रेट खली ने तो WWE में भी भारत का नाम रौशन कर दिखाया । लेकिन क्या आपको मालूम है कि जिस खली को आज पूरी दुनिया जानती है, उस खली को कभी आर्थिक तंगी भी झेलनी पड़ी थी। जी हां, मात्र ढाई रुपए स्कूल की फीस ना दे पाने की वजह से खली को स्कूल से भी निकाल दिया गया था।
खली का पूरा नाम है दलीप सिंह राणा । शायद आपको ये मालूम होगा कि खली की प्रसिद्धियों को देखते हुए खली के उपर एक किताब भी लिखी गई है, जिसका नाम है  ‘The man who became Khali’. बहुत कम लोग जानते होंगे कि खली की जिंदगी में ऐसा समय आया था जब वे स्कूल की फीस नहीं भर सके थे। खली ने अपनी किताब में कहा कि 1979 में गर्मियों के मौसम में खली को स्कूल से निकाल दिया गया था। क्योंकि बारिश नहीं होने से फसल सूख गई थी और घरवालों के पास उनकी फीस भरने के पैसे नहीं थे। जब उनके गरीब माता-पिता उनकी स्कूल फीस के महज ढाई रुपये नहीं भर पाए थे और इस कारण उनका नाम स्कूल से काट दिया गया था।
उन्होंने अपने बचपन के उस पल का खुलासा किया, जिसे जान आप भी हैरान रह जाएंगे। द ग्रेट खली ने ऐसा भी दौर देखा है  जब उन्हें 8 साल की उम्र में पांच रुपये रोजाना कमाने के लिए गांव में माली की नौकरी भी करनी पड़ी थी। खली का बचपन में लोग कद की वजह से मजाक भी बनाते थे। लेकिन अपने मजबूत इरादों से खली ने वो मुकाम हासिल किया है । उन्होंने कहा,‘जब मुझे पहली मजदूरी मिली, वह पल मुझे आज भी याद है। वह अनुभव मैं बयां नहीं कर सकता। वह मेरी सबसे सुखद यादों में से है ।’ 
कभी अपने परिवार का पेट पालने के लिए पिता और भाई के साथ मेहनत- मजदूरी करने वाले इस द ग्रेट खली की मेहनत ऐसी रंग लाई कि, आज वो अपने गांव के विकास के लिए पैसे खर्च कर रहे हैं। खली की मेहनत रंग लाई और उनकी किस्मत ने यू- टर्न ले लिया। आपको बता दें कि खली का जन्म हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के सिराइना गांव में हुआ था। उनकी जन्म गरीब पंजाबी राजपूत फ़ैमिली में हुआ था। उनके पिता ज्वाला राम एक किसान थे और मां तंदी देवी एक हाउस वाइफ़ थी। बचपन में ही खली ‘जाइगैंटिस्म’ नाम की बीमारी से पीड़ित हो गए, जिसके कारण उनका सिर, नाक, ठुड़ी और कान असामान्य रूप से बड़े हो गए थे।
अपने मजबूत इरादों से खली ने वो मुकाम हासिल किया है जो आज से पहले कोई भारतीय पहलवान नहीं कर पाया। खली ने  WWE में बड़े-बड़े सूरमाओं को धूल चटाई है।
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