किसान की जमीन को प्लाट बताकर बेच दिया, पता चलने पर जो हुआ जानिए....

इंदौर के फीनिक्स टाउनशिप फर्जीवाड़े में चंपू अजमेरा की शहर में तलाश चल रही है। उसकी लोकेशन इंदौर मिली है। वही उसकी पत्नी योगिता को शनिवार को जेल भेज दिया गया। चंपू के पिता से पूछताछ के लिए पुलिस टीम बडऩगर स्थित पैतृक मकान पर जाएंगी। लसूडिय़ा पुलिस को धोखाधड़ी के मामले में चंपू उर्फ रितेश अजमेरा की तलाश है। पुलिस ने उस पर चार धोखाधड़ी के केस दर्ज किए थे। शनिवार को एक और केस उस पर दर्ज हुआ। लसूडिय़ा इलाके में फीनिक्स टाउनशिप में लोगो को प्लाट बेचने में उसने गड़बड़ी की है। पुलिस ने चंपू के घर की तलाशी ली थी। उसका एक मोबाइल घर से मिल गया जबकि दूसरा मोबाइल वह साथ ले गया है। 
इसकी लोकेशन देखी तो वह इंदौर की आई। वह बार-बार अपनी लोकेशन बदल रहा है। इसी के चलते क्राइम ब्रांच की टीम उसकी तलाश में जुटी है। चंपू का पैतृक मकान बडऩगर में है। उसके पिता व परिजन वहां रहते है। रविवार को पुलिस टीम बडऩगर जाएंगी। चंपू के पिता से उसके बारें में पुलिस पूछताछ करेंगी। चंपू के पालीवाल नगर स्थित घर पर भी पुलिस की नजर है। फिलहाल यहां पर उसकी बेटी व बेटा रह रहे है। धोखाधड़ी मामले में गिरफ्तार चंपू की पत्नी योगिता को शनिवार को जिला जेल भेज दिया गया। शुक्रवार को उसका जेल वारंट कटा था। समय ज्यादा होने के चलते उसे जेल नहीं भेजा जा सका था। इसी के बाद शुक्रवार रात उसे महिला थाने में रखा गया था।

किसान की जमीन प्लाट बताकर बेची
लसूडिय़ा इलाके में स्थित फीनिक्स टाउनशिप फर्जीवाड़े में शनिवार को एक और केस दर्ज हुआ। पुलिस ने दिनेश विजधाने की रिपोर्ट पर चंपू उर्फ रितेश अजमेरा निवासी पालीवाल नगर, चिराग शाह व अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया। दिनेश ने फीनिक्स टाउनशिप में प्लाट नं 1223, राजेश टाले ने प्लाट नं 1222, तेजराम बांके ने प्लाट नं 1221 का सौदा चंपू व चिराग से किया था। प्लाट का पूरा पैसा देने के बाद उन्हें रजिस्ट्री कर दी गई। लेकिन आज तक कब्जा नहीं मिला। 

दिनेश ने कॉलोनी में जाकर प्लाट की जानकारी जुटाई। पता चला कि जिस जमीन पर उसे प्लाट विकसित कर दिया जाना था वह किसान की जमीन है। वह इस जमीन पर अभी खेती कर रहा है। जब दिनेश ने किसान से बात की तो पता चला यह जमीन तो उसने चंपू को बेची नहीं है। दिनेश ने 30 सिंतबर 2013 को प्लाट का नामांतरण भी करवा लिया था। प्लाट के लिए चंपू व चिराग ने जब कोई संतोष जनक जबाव नहीं दिया तो फरियादी ने लसूडिय़ा थाने व पुलिस अफसरों को शिकायत की।
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