माता का अनोखा मंदिर, यहां मन्नत पूरी होने पर चप्पल चढ़ाते हैं भक्त

हम लोग किसी भी मंदिर में जब दर्शन करने जाते हैं तो प्रसाद के रूप में कोई मीठी चीज या फिर कुछ भी खाने की चीज मिलती है। परंतु जब आपको प्रसाद में चप्पल दे दी जाए तो आपको कैसा लगेगा। अगर आस्था की बात की जाए तो जब हम मंदिर में प्रवेश करते हैं उसे पहले ही हम चप्पल जूते बाहर उतार देते हैं। चप्पल पहनकर मंदिर के अंदर जाना हम गुनाह मानते हैं। ऐसे में अगर आपको प्रसाद के रूप में चप्पल दी जाए तो कितना अजीब लगेगा। परंतु यह सच है ऐसा एक मंदिर में होता है और यह मंदिर मां दुर्गा का है जहां पर नई चप्पल और सैंडल माता को चढ़ाई जाती है।
अब आपको बताते हैं कि आखिर में यह मंदिर कहां स्थित है। यह मंदिर भोपाल कोलार इलाके में एक पहाड़ी पर स्थित है और मंदिर का नाम है जीजी बाई। आप सब जानते हैं कि मंदिरों में अलग-अलग तरह के फूल, मालाएं, चिरौंजी प्रसाद माता रानी को या भगवान को चढ़ाए जाते हैं। परंतु इस मंदिर में बिल्कुल उलट मामला है।
जब किसी वक्त की मन्नत यहां पर पूरी होती है तो वह इस मंदिर में आकर माता रानी को जूते चप्पल चढ़ाता है। यहां के मंदिर के सेवक का नाम ओम प्रकाश महाराज है। उन्होंने बताया कि यहां पर मां दुर्गा की देखभाल एक बेटी की तरह की जाती है। एक बार ओम महराज को सपना आया कि उनकी माता खुश नहीं है इसलिए वह दिन में एक बार नहीं बल्कि 3-4 बार माता रानी के कपड़े बदलते रहते हैं। जैसे हम अपने बच्चों की सेवा करते हैं वैसे ही यहां पर माता रानी की सेवा की जाती है।
जीजी भाई के अलावा इस मंदिर का एक और नाम है सिद्धिदात्री पहाड़ा वाला मंदिर। यहां पर जितने भी मंदिर के सेवक हैं उन सब की यह मान्यता है कि आज से 18 साल पहले इस मंदिर के सेवक ओमप्रकाश में इस मूर्ति की स्थापना की थी और इस मंदिर में स्थापना करने के बाद उन्होंने शिव और पार्वती का विवाह इस मंदिर में ही कराया था। उन्होंने खुद ही माता रानी का कन्यादान भी किया था।
तब से लेकर आज तक ओम महाराज मातारानी को सिद्धिदात्री के नाम से पुकारते हैं और उन्हें बेटी मानते हैं। अब आपको बताते हैं कि यहां पर चप्पल प्रसाद के रूप में क्यों दिया जाता है। जैसा कि आप सब जानते हैं कि मंदिर में लोगों की बहुत सारी चप्पल खो जाती है ऐसे में जब यहां पर बहुत सारी चप्पलें जमा हो जाती है तो भक्तों को प्रसाद के रूप में चप्पलें दी जाती है।
इसके अलावा सेवक ओम महराज जी कहते हैं कि जो भक्त यहां पर आ गए थे। उनकी मन्नते पूरी हो गई है और उसके बाद विदेशों में जाकर बस है। तो वहां से माता रानी के लिए चप्पल भेजते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि मां दुर्गा के लिए सिंगापुर और ऑस्ट्रेलिया से भी चप्पल आई हुई है। जब भक्त उन्हें चप्पल चढ़ाते हैं और उनकी संख्या ज्यादा बढ़ जाती है तो वह चप्पल प्रसाद के रूप में भक्तों को ही बाँट दी जाती है।
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