क्यों दी जाती है दिवाली के दिन उल्लुओं की बलि, क्या है मान्यता आप भी जानें

दिवाली वैसे तो सबके जीवन से अँधेरे को मिटाकर उजाला लाने वाले त्यौहार माना जाता है। इस दिन लोग किसी भी तरह की बुराई से खुद को बचा के रखते हैं लेकिन हमारे समाज में कुछ ऐसी भी अंधविश्वास से भरी मान्यताएं हैं जो लोगन की साड़ी अच्छाई को एक क्षण में तार-तार कर देती है। दिवाली के दिन कई जगहों पर उल्लुओं की बलि देने की प्रथा है और इसके पीछे के अंधविश्वास को जानकर आप भी एक बार को हैरान रह जाएंगे। तो आइये आपको बताते हैं की आखिर दिवाली के दिन उल्लुओं की बलि क्यों दी जाती है।

इस अंधविश्वास के कारण दी जाती है बलि

लोग 21 वीं सदी में तो कदम रख चुके हैं लेकिन आज भी कुछ ऐसी कट्टर मान्यताएं हैं जो लोगों को जीवन में आगे बढ़ने का मौका है दे रही है। ऐसी एक अन्धविश्वास है दिवाली के दिन उल्लुओं की बलि देने की, इस अंधविश्वास के पीछे मान्यता ये है की इससे लक्ष्मी माता प्रसन्न होती हैं। उल्लू को लक्ष्मी माता का प्रतीक माना जाता है और लोगों का मानना है की यदि दिवाली और धनतेरस के दिन उल्लुओं की बलि दी जाए तो इससे लक्ष्मी माँ प्रसन्न होकर धन-धान में वृद्धि होने का आशीर्वाद देती है, लेकिन ये महज एक अंधविश्वास है।

ऐसे दी जाती है उल्लुओं की बलि

जो लोग इस मान्यता में विश्वास रखते हैं वो दिवाली से कम से कम 20-25 दिन पहले ही उल्लू खरीद के अपने घर ले आते हैं और दिवाली तक बलि से पहले उसे खूब खिलते पिलाते हैं। उल्लुओं को ख़ास तौर पर बलि से पहले शराब पिलाई जाती है और आपको जानकार हैरानी होगी की इस समय एक उल्लू कम से कम 500 से 600 तक का बिकता है। उल्लुओं की बलि देने के बाद उसके आँख नाक और पंखों की पूजा की जाती है। कई जगहों पर दिवाली से पहले उल्लुओं की तस्करी भी की जाती है और इस समय एक उल्लू की कीमत 1000 रूपये तक भी पहुंच जाती है। लोग ऐसा करते तो हैं लेकिन भारत में उल्लुओं की तस्करी करना गैरकानूनी है और ऐसा करने पर पकड़े जाने पर लोगों को सजा भी मिल सकती है और साथ में जुर्माना भी भरना पड़ सकता है।
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