जानिए कैसे हुआ भगवान शिव की बहन असावरी का जन्म

भगवान शिव की पत्नी पार्वती और उनके बच्चो गणेश-कार्तिक के बारे में तो सारी दुनियां जानती हैं. लेकिन बहुत कम लोगो को ये बात पता हैं कि भगवान शिव की एक बहन भी थी जिसका देवी असावरी था. आज हम आपको शिव भगवान की इस बहन के जन्म की कहानी सुनाएंगे.
जब पार्वती और शिव का विवाह हुआ था तो माँ पार्वती कैलाश पर्वत पर शिवजी के साथ रहने आ गई थी. कैलाश पर्वत पर सभी पुरुष नागरिक ही थे यहाँ एक भी महिला नहीं रहती थी. ऐसे में माँ पार्वती काफी बोर हो जाती थी. एक दिन उन्होंने भगवान शिव से कहा कि “काश! आपकी कोई बहन होती. यदि ऐसा होता तो मैं और मेरी ननंद खूब बातें करते और मैं कभी बोर नहीं होती.”
इस पर भगवान शिव बोले “देवी पार्वती! मैं तुम्हे ननंद ला तो दूं, पर क्या तुम्हारी उसके साथ बनेगी?”
“मेरी भला ननंद के साथ क्यों नहीं बगेगी?” पार्वती जी से जवाब दिया.
पार्वती का जवाब सुन शिवजी मुस्कुराए और बोले “ठीक हैं मैं तुम्हे ननंद लाकर दूंगा.”
इसके बाद भगवान शिव ने अपनी चमत्कारी शक्तियों का प्रयोग कर अपनी एक देवी की उत्पत्ति की और पार्वती जी से बोले “हे पार्वती! ये लो तुम्हारी इच्छा पूरी हो गई. ये महिला मेरी बहन और तुम्हारी ननंद हैं. इसका नाम असावरी देवी हैं.”
असावरी देवी देखने में पूरी तरह शिवजी जैसी ही थी. पैदा होते समय उनके पैर में एक बड़ी सी दरार थी और वो जानवर की खाल के आलवा कुछ नहीं पहने थी.
अपनी ननंद को देख पार्वती जी बड़ी खुश हुई. उन्होंने अपनी ननंद को सजाने के लिए अपने कपड़े दिए लेकिन वो छोटे पड़ गए. इसके बाद जब ननंद ने भोजन की फरमाइश की तो पार्वती ने बड़े प्यार से ननंद को भोजन खिलाना शुरू किया. लेकिन असावरी देवी का पेट इतनी आसानी से नहीं भरा वे धीरे धीरे कर कैलाश पर्वत में रखा सारा भोजन ग्रहण कर गई. अब यहाँ भगवान शिव और कैलाश के अन्य लोगो के लिए खाने को कुछ भी नही बचा था.
असावरी की इस हरकत को देख पार्वती जी टेंशन में आ गई और खाने की समस्यां की शिकायत लेकर शिवजी के पास जानने लगी. लेकिन तभी असावरी देवी को एक शरारत सूझी और उन्होंने पार्वती जी को अपने पैरो की दरारों के बीच छिपा लिया.
थोड़ी देर बाद जब शिवजी ने आकर पार्वती के बारे में पूछा तो असवारी ने कहा उन्हें कुछ नही पता हैं. लेकिन शिवजी असावरी की शरारत समझ गए. उन्होंने असावरी से पार्वती को आजाद करने की विनती करी. इसके बाद असावरी ने अपना पैर झटका और उसमे से पर्वती माँ बाहर गिर गई.
अब पार्वती जी का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच चुका था. उन्होंने शिवजी से विनती करी कि वे असावरी को ससुराल भेज कैलाश पर्वत से विदा करे. जिसके बाद शिवजी ने असावरी देवी को कैलाश से विदा कर दिया.
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