महापर्व छठ पर्व का क्या है महत्व और क्यों मनाया जाता है ये पावन त्यौहार यहाँ जाने

हिन्दू धर्मशास्त्रों में दिवाली के बाद साल का सबसे बड़ा पर्व छठ पर्व होता है जिसे पुरे देश में मनाया जाता है। चार दिनों तक चलने वाले इस महापर्व का बहुत ही ज्यादा महत्व है और विशेष रूप से बिहार और उत्तर प्रदेश में मनाया है। आइये आपको बताते हैं की आखिर क्यों मनाया जाता है ये त्यौहार और क्या है इसके पीछे मान्यता।

छठ महापर्व को मानाने के पीछे क्या है मान्यता

लगातार चार दिनों तक चलने वाला ये पवन त्यौहार मानाने के पीछे मान्यता ये है की लोग इस पर्व में सूर्य देव की उपासना करते हैं और अपने घर परिवार के लिए सुख समृद्धि की कामना करते हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार छठी माता को सूर्य देव की बहन माना जाता है और इसलिए इस पर्व को विशेष रूप से सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए मनाया जाता है। छठी माता की महिमा को अपरमपार माना गया है और ऐसी मान्यता है की छठ पर्व मानाने पर छठी माता उनके संतानों की हमेशा रक्षा करती हैं। इस बार चार दिनों तक चलने वाला ये पर्व 24 अक्टूबर से 27 अक्टूबर तक चलेगा। इस पर्व के पहले दिन “नहाय खाये” मनाया जाता है, दूसरे दिन “खरना”, तीसरे दिन साँझ का अर्घ और चौथे दिन सुबह का अर्घ जिसमे सूर्य देव को अर्घ दिया जाता है।

पुरे उत्तर भारत में मनाया जाता है ये त्यौहार

छठ का ये पावन त्यौहार बिहार उत्तर प्रदेश समेत पुरे उत्तर भारत के लोग मनाते हैं। इस मनाने के पीछे लोगों के मन में श्रद्धा भाव होना है, छठ पर्व साल में दो बार मनाया जाता है एक चैत माह में जिसे चैती छठ कहते हैं कार्तिक माह में जिसे मुख्य छठ माना जाता है। हिन्दू धर्मशास्त्र में इस महापर्व की खासा मान्यता है और इसे बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है।
छठ पूजा करने वाले लोग खरना के दिन रात को पूजा आराधना करने के बाद कुछ खा कर व्रत शुरू कर देते हैं जो तीसरे दिन सूर्य को अर्घ देने के बाद प्रसाद ग्रहण करके तोड़ा जाता है। लोग परिवार संग इस महापर्व को मनचाहे फल प्राप्ति के लिए करते हैं और परिवार में खुशहाली बनी रहें और बाल बच्चे की सलामती रहें।
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