अगर नहीं है आपकी बहन तो कुछ इस तरह मनाएं भाईदूज, होता है बेहद लाभकारी

भाई दूज का त्योहार भाई और बहन के पवित्र रिश्ते का प्रतीक है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की खुशी और लंबी आयु के लिए मुत्यु के देवता यमराज की पूजा करती हैं। कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को यम द्वितीया एवं भाई दूज कहा जाता है। भाई दूज का यह त्योहार शनिवार को है। कहा जाता है कि लो भी इस दिन यमराज ने अपनी बहन यमुना को दर्शन दिए थे।
यमुना के स्वागत से खुश होकर यमराज ने वरदान दिया था कि इस दिन जो बहनें अपने भाइयों की लंबी आयु की कामना करके उनके लिए व्रत रखेंगी, टीका करेंगी तो उनके भाइयों की रक्षा स्वंय यमराज करेंगे। वहीं ये भी कहा जाता है कि भाई इस दिन अपनी बहनों से तिलक करवा कर उनके हाथ का बना हुआ खाना खाते हैं, उनकी रक्षा खुद यम देवता करते हैं।
वहीं आपको बता दें कि इस दिन बहन अपने भाई के जीवन में सफलता पाने और उसकी लम्बी आयु, अच्छा स्वास्थ के लिए दुआ करती है और फिर अपने अपने भाई को तिलक करती है। वहीं इस दिन जिन लोगो की बहन की शादी हो जाती है वो भाई अपने बहन के घर जाते है वहां ये त्‍योहार मनाते हैं और फिर उस दिन अपनी बहन के हाथ का बना हुआ खाना खाते हैं।
यही कारण है कि भाई दूज का ये त्यौहार बहुत ही पावन माना जाता है साल भर में आने वाले त्योहारों में से भाई बहन के स्नेह के लिए भी बहुत महत्व रखता है। अगर किसी की सफी बहन नही होती है तो उनकी चचेरी बहन या ममेरी बहन या ममेरी बहन उस भाई के लिए तिलक करती है और उसके जीवन के लिए प्रार्थना करती है।

वही आपको बता दें कि इस दुनिया में जिस किसी की बहन नहीं है उसे निराश होने की जरूरत नहीं है वो इस त्‍योहार को मनाने के लिए वो किसी गाय या फिर किसी नदी के पास बैठकर भोजन कर लेगा तो उसे बहुत लाभ होगा क्‍योंकि ये भी शुभ माना गया है। इस दिन यमराज व यमुना जी के पूजन का विशेष महत्व है इस प्रकार से भाई दूज का त्यौहार बहुत शुभ माना जाता है।

Previous Post Next Post

.