संतान की लम्बी उम्र के लिए हर माँ को रखना चाहिए यह व्रत

भारत में हर साल कई त्यौहार मनाए जाते हैं. हाल ही में महिलाओं ने अपने पति की लम्बी उम्र के लिए करवाचौथ का व्रत रखा था. लेकिन क्या आप जानते हैं एक ऐसा व्रत भी हैं जिसे रखने से संतान की उम्र लम्बी होती हैं. इस व्रत को कार्तिक माह की अष्टमी के दिन रखा जाता हैं. इसे अहोई अष्टमी का वृत्त कहा जाता हैं. इस व्रत को केवल महिलाएं ही अपने बच्चे के लिए रख सकती हैं.
अहोई व्रत उत्तर भारत में सबसे अधिक पॉपुलर हैं. खासकर की राजस्थान की महिलाएं यह व्रत जरूर करती हैं. यह व्रत कार्तिक माह की अष्टमी को किया जाता हैं. इस दिन महिलाएं संतान की लम्बी आयु के लिए दिवार पर अहोई माता का चित्र बनाती हैं. संतान के अच्छे स्वास्थ और लम्बी उम्र के अलावा कुछ महिलाए यह व्रत संतान प्राप्ति के लिए भी करती हैं.

अहोई अष्टमी व्रत की विधि

इस दिन महिलाओं को सूर्य उदय होने के पूर्व उठना होता हैं. इस दिन महिलाएं स्नान करने के बाद फल खाती हैं और  फिर मंदिर दर्शन के लिए भी जाती हैं. मंदिर में पूजा के साथ इस व्रत की शुरुआत हो जाती हैं. इसके बाद दिन भर महिलाएं सिर्फ पानी पी कर ही रहती हैं. रात में जब चाँद निकलता हैं तब महिलाऐं अपने इस व्रत को तोड़ देती हैं और भोजन ग्रहण करती हैं.
इस दिन दिवार पर अहोई माता का चित्र बना कर उनकी पूजा अर्चना की जाती हैं. दिवार पर एक छोटे बच्चे का चित्र भी बनाया जाता हैं. इस पूजा में जल से भरे पीतल के पात्र को माता की प्रतिमा के आगे रखा जाता हैं. अब इस पात्र पर सिंदूर लगा धागा बाँधा जाता हैं. पात्र पर स्वस्तिक का निशान भी बनाया जाता हैं.
इसके बाद गेहूं से भरी थाली माता के चरणों में भेंट की जाती हैं. साथ ही पका हुआ खाना जैसे पुड़ी हलवा इत्यादि का भोग लगाया जाता हैं. इसके बाद घर की बड़ी औरत या दादी द्वारा अहोई अष्टमी व्रत की कथा पड़ी जाती हैं. कथा समाप्त होने के बाद प्रसाद को परिवार के सदस्यों में बांटा जाता हैं.
इस व्रत को विधि विधान से करने पर अहोई माता आपकी संतान की आयु लम्बी करती हैं और जिन माताओं को संतान नहीं हो रही हैं उन्हें भी जल्द ही संतान की प्राप्ति होती हैं.
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