ऐसी भाग्य रेखा व्यक्ति को बना देती है सफल और महान, देखें क्या आपकी हथेली में है ये रेखा

जो कोई इस दुन‌िया में आता है अपना भाग्‍य लेकर आता है उसका भाग्‍य और कहीं नहीं बल्कि खुद उसके हाथों में होता है। जो उसे आगे चलकर सफल बनाता है। आज हम आपको कुछ ऐसी बातें बताने जा रहे हैं जिससे आपको अपनी भाग्यरेखा को पढ़ने के ल‌िए क‌िसी हस्तरेखा व‌िशेषज्ञ के पास नहीं जाना होगा बल्कि आप ये खुद से जान सकेंगे। इसके लिए बस आपको कुछ बातों का ज्ञान होना आवश्‍यक है तो आइए जानते हैं क्‍या कहती है आपकी भाग्‍य रेखा।
बता दें कि भाग्‍य रेखा की बनावट ये सटीक रूप से बताती है कि व्‍यक्ति भाग्‍यशाली है या फिर दुर्भाग्‍यशाली। ये रेखा उन चीजों को भी दर्शाती है जो व्‍यक्ति के नियंत्रण से बाहर होते हैं जैसे शिक्षा, कैरियर, जीवन साथी संबंधी हर तरह के निर्णय में सफलता और विफलता को दर्शाती है।
भाग्य रेखा कलाई से शुरू होकर मध्यमा अंगुली तक पहुँचती है इसके अलावा बता दें की भाग्य रेखा अन्य कई जगहों से शुरू हो सकती है लेकिन खत्म शनि पर्वत पर ही होती है। अक्सर ये रेखा मणिबंध, शुक्र पर्वत, जीवन पर्वत व हृदय रेखा से शुरू हो सकती है। इस रेखा के उद्गम स्थान से पीटीए चलता है की व्यक्ति का भाग्य कैसा होगा।
शास्त्रों में बताया गया है की इस भाग्य रेखा का फल आसानी से तभी मिलता है जब इसे कोई अन्य अन्य रेखा काटती नहीं हो। जिस स्थान पर भाग्य रेखा कटी होती है जीवन के उस पड़ाव में व्यक्ति को संघर्ष और कष्ट का सामना करना पड़ता है। शनि पर्वत पर पहुंचकर रेखा अगर बंट जाए और गुरू पर्वत यानी तर्जनी उंगली के नीचे पहुंच जाए तो व्यक्ति दानी एवं परोपकारी होता है। यह उच्च पद और प्रतिष्ठा प्राप्त करता है। लेकिन इस रेखा को कोई अन्य रेखा काटती नहीं हो।

हस्तरेखा विज्ञान के अनुसार भाग्य रेखा लंबी होकर मध्यमा पर खत्म हो जाती है तो व्यक्ति को काफी परिश्रम करने के बाद भी सफलता नहीं मिल पाती। हथेली के मध्यम में मस्तिष्क रेखा से निकलकर कोई रेखा शनि पर्वत तक जाना बहुत ही उत्तम होता है। ऐसा व्यक्ति सामान्य परिवार में जन्म लेकर भी अपनी योग्यता और लगन से सफलता के शिखर पर पहुंच जाता है। शनि पर्वत पर जाकर रेखा दो भागों में बंट जाना और भी उत्तम फलदायी होता है।

मध्यमा अंगुली के नीचे शनि पर्वत का स्थान है। यह पर्वत बहुत भाग्यशाली मनुष्यों के हाथों में ही विकसित अवस्था में देखा गया है। इस पर्वत के अभाव होने से मनुष्य अपने जीवन में अधिक सफलता या सम्मान नहीं प्राप्त कर पाता।  भाग्य रेखा जीवन रेखा से दूर हो और चंद्र से निकलकर कोई पतली रेखा भाग्य रेखा में मिलती नजर आती हो और इसके अलावा चंद्र, भाग्य और मस्तिष्क रेखाएं ऐसी दिखे जिससे त्रिकोण बना नजर आए और ये सारी रेखाएं दोष रहित हों, उंगलियां सीधी और सभी ग्रह पूर्ण रूप से विकसित हो तो ऐसे लोगों को अकस्मात धन मिलता है।
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