जाने, आखिर क्यों सृष्टि की रचना करने वाले परमपिता भगवान् ब्रह्मा की नहीं की जाती पूजा !

ये तो सब जानते है कि इस सृष्टि की रचना परमपिता भगवान् ब्रह्मा जी ने की थी. जी हां यानि ब्रह्मा जी इस सृष्टि के रचियता है और विष्णु भगवान् जी इस सृष्टि के पालनकर्ता है. वही कैलाशपति भगवान् शंकर इसके संहारक है. मगर आपको जान कर हैरानी होगी कि ब्रह्मा, महेश और विष्णु इन तीनो भगवानो में से केवल ब्रह्मा जी की पूजा नहीं की जाती. बरहलाल क्या आपके दिमाग में कभी ये ख्याल नहीं आया कि जिस भगवान् ने इस सृष्टि की रचना की, आखिर उनकी पूजा क्यों नहीं की जाती. वैसे हम आपको बता दे कि आज हम इसी सवाल का जवाब लाए है.
आपको जान कर ताज्जुब होगा कि पूरी दुनिया में ब्रह्मा जी का केवल एक ही मंदिर है, जो पुष्कर में स्थित है. वही अगर शास्त्रों की बात करे तो ऐसा कहा जाता है कि एक बार ब्रह्मा जी को धरती की भलाई के लिए यज्ञ करने का ख्याल आया. ऐसे में यज्ञ करने के लिए स्थान की खोज शुरू हुई. जिसके चलते ब्रह्मा जी ने अपने हाथ से कमल लेकर उसे धरती पर भेजा. ऐसे में कमल का फूल घूमते घूमते पुष्कर तक पहुंच गया. बता दे कि कमल के लिए तालाब का होना जरुरी है. ऐसे में वहां एक तालाब का निर्माण किया गया. इसके बाद यज्ञ करने के लिए ब्रह्मा जी इस स्थान पर पहुंचे. मगर यज्ञ के समय उनकी पत्नी सावित्री वहां नहीं पहुँच सकी.
गौरतलब है कि यज्ञ करने में देर हो रही थी, इसलिए ब्रह्मा जी ने एक स्थानीय गाय चराने वाली लड़की से ही शादी कर ली और फिर यज्ञ में बैठ गए. मगर थोड़ी देर बाद ही ब्रह्मा जी की पत्नी सावित्री वहां पहुंच गई. ऐसे में उन्होंने देखा कि उनकी जगह कोई और स्त्री यज्ञ में बैठी है और ये सब देख कर सावित्री जी को बहुत गुस्सा आया. ऐसे में उन्होंने भगवान् ब्रह्मा जी को श्राप दे दिया. जी हां भगवान् ब्रह्मा जी को श्राप देते हुए सावित्री ने कहा कि आज के बाद आपकी धरती पर कभी पूजा नहीं होगी और इंसान आपको कभी याद नहीं करेंगे. बता दे कि गुस्से के मारे सावित्री जी काफी कांप रही थी. ऐसे में उनके रौद्र रूप को देख कर और श्राप को सुन कर देवता भी डर गए.
बता दे कि उन्होंने सावित्री जी से श्राप वापिस लेने की बहुत विनती की, लेकिन एक बार जो श्राप दे दिया जाए उसे वापिस नहीं लिया जा सकता. हालांकि उसकी तीव्रता कम जरूर की जा सकती है. जब सावित्री जी का गुस्सा शांत हुआ तब उन्हें एहसास हुआ कि उन्हें ऐसा श्राप नहीं देना चाहिए था. ऐसे में उन्होंने नरम स्वभाव में कहा कि ब्रह्मा जी की पूजा केवल पुष्कर में ही होगी और पुष्कर के इलावा अगर दुनिया के किसी भी कोने में ब्रह्मा जी का मंदिर बना तो वहां घोर सर्वनाश होगा. यही वजह है कि दुनिया के किसी भी कोने में ब्रह्मा जी की पूजा नहीं की जाती.
वैसे आपको बता दे कि हिन्दू मान्यताओं के अनुसार ब्रह्मा जी वो देवता है, जिनके चार हाथ है और इन चारो हाथो में आपको चार किताबे भी दिखाई देती है. बता दे कि ये चारो किताबे ही चार वेद है. इसके साथ ही आपको बता दे कि पुष्कर में स्थित ब्रह्म मंदिर का पद्य पुराण में भी उल्लेख किया गया है. इसके इलावा पुराण में ये भी कहा गया है कि ब्रह्मा जी इस जगह पर दस हजार सालो तक रहे थे और इन्ही सालो में उन्होंने सृष्टि की रचना की थी. फिर जब सृष्टि की रचना पूरी हुई तो उन्होंने इसके विकास के लिए पांच दिन का यज्ञ भी किया था.

इसी यज्ञ के दौरान सावित्री जी वहां पहुँच गई थी और उनके श्राप के कारण ही आज भी तालाब की पूजा तो की जाती है, लेकिन ब्रह्मा जी की पूजा नहीं होती. ऐसे में श्रद्धालु दूर से ही उनकी प्रार्थना कर लेते है.

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