जानिए दिवाली पर रंगोली किस वजह से बनाई जाती हैं

भारत के हर त्यौहार में रंगों का बड़ा महत्त्व रहता हैं. फिर चाहे वो दिवाली हो या होली. यह रंग हमारे जीवन में खुशियाँ घोलने का काम करते हैं. भारतीय संस्कृति में रंगोली बनाने की परंपरा बहुत पुरानी हैं. हर साल दिवाली आते ही लोग अपने घर आँगन में रंगोली बनाने लगते हैं. यहाँ तक कि छोटे गाँव खेड़े से लेकर बड़ी बड़ी होटलों में भी इस रिवाज को निभाया जाता हैं. लेकिन क्या आप ने कभी सोचा हैं दिवाली पर यह रंगोली आखिर क्यों बनाई जाती हैं? दिवाली पर रंगोली का क्या महत्व होता हैं? चलिए हम आपको बताते हैं.
रंगोली एक प्राचीन संस्कृत शब्द हैं जिसका मतलब होता हैं रंगों से भावनाओं को व्यक्त करना. वहीँ भारत के अन्य क्षेत्रो में इसे ‘अल्पना’ के नाम से भी जाना जाता हैं. अल्पना भी एक संस्कृत शब्द ‘अलेपना’ से बना हैं. इसका अर्थ होता हैं लीपना या लेपन करना. यही कारण हैं कि जब भी रंगोली बनाई जाती हैं तो पहले जमीन को लीपा जाता हैं और उसी के ऊपर रंगों का लेप यानी रंगोली बनाई जाती हैं.
आसन शब्दों में कहे तो रंगोली हिन्दू धर्म में आने वाले त्योहारों पर अपनी श्रद्धा और भावना को अभिव्यक्त करने का एक माध्यम बन जाती हैं. सामान्यतः रंगोली को स्वागत के लिए शुभ संकेत माना जाता हैं. यही कारण हैं कि गणेश चतुर्थी, दुर्गा अष्टमी, घर का कोई नया कार्यक्रम सहित दिवाली पर भी रंगोली बनाई जाती हैं.
आपको बता दे कि प्राचीन समय में तो लोग फूलो से बने गीले रंग से दीवारों पर भी रंगोली और अन्य आकृतियाँ बनाया करते थे. लेकिन आधुनिक समय के अनुसार यह अब बस जमीन पर दिवाली के दिनों में बनने वाली आकृति रह गई हैं.
पारंपरिक रूप से रंगोली में देवी देवताओं की तस्वीर या उनसे सम्बंधित चीजों को बनाया जाता हैं. लेकिन मॉडर्न ज़माने के चलते लोग इस रंगोली में तरह तरह की चीजे बनाने लग गए हैं.
नार्मल रंगों से रंगोली बनाने के अलावा कुछ लोग तो फूल, चावल, सिंदूर, हल्दी इत्यादि से भी आकर्षक रंगोली बना लेते हैं. दिवाली पर रंगोली के साथ स्वास्तिक का चिह्न, कमल का फूल और लक्ष्मी जी के पग बनाना शुभ होता हैं.
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