विष्णु पुराण में वर्जित माना गया है इन चीजें को बेचना, झेलना पड़ सकता है भारी नुक्सान

हिन्दू धर्म में पुजा-पाठ और देवी देवताओं को बहुत महत्व दिया जाता है। यूं तो मान्यता है की पूरे ब्र्म्हाण्ड में कुल 14 करोड़ देवी-देवता है मगर कुछ भगवान लोग विशेष रूप से पूजे जाते है जिनसे एक है विष्णु भगवान। बता दे की विष्णु पुराण के अनुसार भगवान विष्णु के सभी अवतारों से संबंधित एक पौराणिक ग्रंथ है जिसमें वह तमाम बातें लिखीं हुई हाइजो आज कलियुग के समय में काफी ज्यादा कारगर साबित हो रही है।
अगर पंडितों-पुरोहितों की बातों को अनसुना ना किया जाए तो विष्णु पुराण में ऐसा बहुत सी बातें है जिन पर हम सभी को गंभीरता से विचार  करना चाहिए, क्योंकि यह बातें हमारे जीवन को काफी प्रभावित करती है। सबसे पहले तो आपको बताना चाहेंगे की आप अपने लाभ के लिए कभी भी किसी गरीब असहाय व्यक्ति को उसकी परिस्थिति को देखने समझने के बाद भी उससे पैसे कमाने का जरीया ढूंढना बहुत बड़ा अधर्म माना गया है।
कहा जाता है की मुह के स्वाद को बदलने या पूरा करने के लिए किसी निरीह या निर्दोष जानवर की हत्या करना सबसे बड़ा पाप माना जाता है।बताना चाहेंगे की हिन्दू धर्म में गाय की हमेशा से पुजा होती आई है और इसे हमेशा ऊंचे पद पर रखा गया है। मगर कुछ लोग स्वार्थी बन जाते है और गाय के अमृतरूपी दूध को बेचकर उसका इस्तेमाल लाभ प्राप्ति के लिए करने लगते है जो विष्णु पुरंके अनुसार महापाप की श्रेणी में आता है।

शास्त्रों में बताया गया है की विष्णु पुराण में कहा गया है की कभी भी पूजा के लिए उपयोग में लाये गए सफेद वस्त्र आप चाहें तो बेच सकते है मगर कभी गलती से भी पूजा में इस्तेमाल लाल वस्त्र को नहीं बेचना चाहिए, यह बहुत ही ज्यादा अशुभ माना जाता है, साथ ही यह भी कहा गया है की गाय के दूध से बनाया गया घी, हमेशा घर में ही इस्तेमाल होना चाहिए, इसकी खरीदारी करना और बेचना पाप के समान माना जाता है।

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