मानव शरीर के अंदर मौजूद हैं इस प्रकार के वायरस


दुनिया भर में कोरोना का प्रकोप बढ़ता ही जा रहा है।कोरोना से अभी तक 21 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं, वहीं इससे मरने वालों की संख्या डेढ़ लाख तक पहुंचने को है। हमारे द्वारा वायरस के बारे में कुछ खास जानकारी जुटाई है। वायरस जिन्हें हम विषाणु भी कहते हैं। बैक्टीरिया से 100 गुना छोटे होते हैं। ये आम माइक्रोस्कोप से भी नहीं देख जा सकते। ये जीव और निर्जीव के बीच की स्थिति में होते हैं। सही हालात मिले तब ये खुद के प्रतिरूप बनाने लग जाते हैं और कुछ अन्य स्थितियों में तो एक निर्जीव की तरह लंबे समय तक पड़े भी रह सकते हैं नहीं तो ये खत्म भी हो जाते हैं।


जब उन्हें अनुकूल परिस्थितियं मिलती हैं (जैसे मानवीय कोशिका) तो ये खुद के प्रतिरूप बनाना शुरू कर देते हैं। इनका अपना कोई कोशिका तंत्र नहीं होता और ये अपने आप ही खुद की संख्या नहीं बढ़ा सकते। वे केवल प्रोटीन में लिपटे एक डीएनए या आरएनए जीन भर होते हैं। आमतौर पर माना जाता है कि वायरस इंसान के लिए खतरा ही होते हैं। लोगों को उन्हीं वायरस के बारे में मालूम होता है जो किसी जानलेवा बीमारी का कारण बन गए हैं। या फिर सामान्य सा जुकाम का जिम्मेदार भी वायरस ही होते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं बहुत से वायरस हैं जो इंसान में लंबे समय से मौजूद रहते हैं।


इंसान में वायरस पहले से ही बड़ी संख्या में मौजूद रहते हैं। इन्हें सामूहिक रूप से ह्यूमन वायरोम कहा जाता है। इंसान में वायरस बनते रहते हैं और बदलते भी रहते हैं। मजेदार बात यह है अभी तक इंसान में रहने वाले सभी वायरस को नहीं परखा जा सका है। नए तरह के वायरस इंसान में बनते रहते हैं। वायरस मानव के शरीर के हर अंग में पाये जाते हैं। इनमें ज्यादातर वायरस आमतौर पर नुकसान दायक नहीं होते हैं। नए वायरस हमारे इम्यून सिस्टम को बेहतर बनने में मदद करते हैं। हमारा इन्यून सिस्टम इनसे लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता विकसित करता है। पाया गया है कि कई नवजात शिशुओं को माताओं के दूध से एंटीजन मिलते हैं जो उनकी इन्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है और कई बीमारियों से बचाता है।

Previous Post Next Post

.