आटा और चीनी के बाद खजूरों का स्‍कैंडल


पाकिस्‍तान में आटा और चीनी के बाद अब रमजान के महीने में खाई जाने वाली खजूर स्‍कैंडल की चर्चा जोरों पर है। बताया जा रहा है ‎कि यूटिलिटी स्टोर्स को दिए गए राहत पैकेज के जरिये चेयरमैन यूटिलिटी स्टोर्स कॉर्पोरेशन को फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई है। एक वेबसाइट की खबर के हवाले से कहा गया है कि एक निजी टीवी पर अपने कार्यक्रम दस तक में उन्‍होंने कहा कि सरकार ने यूटिलिटी स्टोर्स कॉर्पोरेशन के लिए एक राहत पैकेज की घोषणा की। इस पैकेज में सरकार ने दावा किया कि वे पांच वस्तुओं के बजाय 19 वस्तुओं पर सब्सिडी दे रहे हैं, जिसके लिए यूटिलिटी स्‍टोर्स को 50 अरब रुपये दे दिए गए हैं। 


जानकारी के मुता‎बिक हमाद अजहर का दावा हैं कि इस बार अतिरिक्त वस्तुओं पर सब्सिडी दी जा रही है, लेकिन तथ्य यह है कि सरकार आटा, चीनी, घी और दालों आदि पर सब्सिडी दी जाती है, जबकि अन्य दस वस्तुओं जिनमें पांच सब्जियां और पांच दालें शामिल हैं, उन्हें सरकार बाज़ार से खरीद कर अवाम को कम कीमत पर मुहैया कराती है मगर एक बार फिर सरकार पर उंगलियां उठ रही हैं। यूटिलिटी स्टोर्स कॉर्पोरेशन की ओर से 15 अप्रैल को एक हजार टन खजूरों की खरीदारी के लिए टैंडर जारी किया गया था। इसके खुलने की तारीख 5 मई है। यानी उस वक्‍त पाकिस्‍तान में 11 वां रमजान होगा। अन्‍य देशों से खजूरें पाकिस्‍तान पहुंचने में कम से कम तीन सप्ताह लगेंगे। इन तीन हफ्तों के दौरान रमजान का महीना खत्म हो चुका होगा यानी खजूरें यूटिलिटी स्‍टोर्स में रमजान के बाद पहुंचेंगी।


सवाल उठता है कि रमजान के बाद खजूरों की खरीदारी का असल मकसद क्‍या है? क्या यह खरीदारी किसी विशिष्ट व्यक्ति या कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए है? वहीं टैंडर नोटिस में खजूरों की क्रिस्टल पैकिंग की बात भी की गई है। सवाल यह भी है कि इनकी पैकिंग व्‍यापारी कहां से करवाएंगे? क्या इसका उद्देश्य पैकेजिंग उद्योग में लोगों को लाभ पहुंचाना है? सवाल यह वह इर्म्‍पोटेड खजूरें कैसे खरीद सकता है? क्‍या आटे, चीनी और बिजली स्‍कैंडल के बाद खजूरों के आयात का स्‍कैंडल भी तैयार किया जा रहा है? गौरतलब है कि पाकिस्‍तान में कोरोना वायरस के संक्रमण के बाद देश के आर्थिक हालात और भी खराब हो गए हैं। लोगों को भुखमरी से बचाने के लिए अमल में लाई जा रही योजनाएं भ्रष्‍टाचार का शिकार हो रही हैं।

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