आपके साथ भी हो रही है ऐसी घटनाएं तो आप भुगत रहे हैं पूर्वजों के कर्म

ऐसा कहा जाता है कि हम जो बोलेंगे वही काटेंगे गीता के अनुसार हर मनुष्य को अपने कर्मों का फल इसी जन्म में भोगना पड़ता है। इस संसार में ही रहते हुए हम कल की चिंता किए बिना कर्म नहीं कर पाते हैं लेकिन हमें फल की चिंता किए बिना कर्म करना चाहिए यही हर मनुष्य का कर्तव्य होता है।
वास्तविक जीवन में हमारे साथ ऐसा कई बार हो जाता है जब हमें हमारे स्वभाव के विपरीत कल मिलते हैं। हमारे कहने का तात्पर्य यह है कि कई बार लोग बहुत अच्छा कार्य करते हैं इसके बावजूद उन्हें बहुत विपरीत स्थितियों से गुजरना पड़ता है। कई बार ऐसा होता है कि अच्छे स्वभाव के लोगों के साथ लगातार दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं होती रहती हैं। जबकि कई दुष्ट मनुष्यों के साथ भाग्य पूर्ण घटनाएं होती हैं। ऐसे में हम यह सोचने पर मजबूर हो जाते हैं कि आखिर अच्छे इंसान ने ऐसा क्या पाप कर दिया कि उसके साथ लगातार सब कुछ बुरा ही हो रहा है।
मनुष्य का जन्म उसके पूर्व जन्म के अनुसार ही होता है। ऐसा कहा जाता है कि बच्चे अपने माता पिता का महत्वपूर्ण अंग होते हैं और अपने माता-पिता का ही दूसरा रुप होते हैं। माता पिता की सोच और स्थिति का असर उनके बच्चों के जीवन पर भी काफी पड़ता है।
यह संभव हो सकता है कि आपके माता पिता ने बहुत अच्छे कर्म किए हो और आप बहुत बुरे इंसान हैं। इसके बावजूद आपके साथ सब कुछ अच्छा हो रहा है। इसका अर्थ यह है कि आपके माता पिता के कर्मों का फल आपको मिल रहा है। ऐसा बहुत बार देखा गया है कि कोई व्यक्ति जो अत्यधिक क्रूर होते है। फिर भी उसे अपने जीवन में हर तरह का सुख मिल जाता है। यह उसके नहीं बल्कि उसके पूर्वजों के कर्म होते हैं जिनका व लाभ उठाता है।
ऐसा संभव है कि आपके पारिवारिक कर्मों के कारण आपको दुख प्राप्त हो रहा है। ऐसे में आप को दुखी नहीं होना चाहिए बल्कि यह समझ कर चलना चाहिए कि आपके पारिवारिक कर्मों का फल है। दूसरों को देख कर आप को यह नहीं सोचना चाहिए कि वह कितने खुश हैं बल्कि आपको पूरी ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए।

कैसे जोड़ते हैं पूर्वजों के कर्म आपकी जिंदगी से

कई बार ऐसा होता है कि हमारे पूर्वजों के किए हुए कर्म हमें भुगतने पड़ते हैं। हमारे साथ ऐसा बहुत बार होता है कि हमने कोई गलती नहीं की होती फिर भी उसका इल्जाम हमें झेलना पड़ता है और कई बार हमारे साथ ऐसा भी हो जाता है कि जिस शुभ कार्य में हमने अत्याधिक होता नहीं किया उसका फल हमें आसानी से प्राप्त हो जाता है। हमारे कहने का अर्थ सिर्फ इतना है कि ऐसा जरूरी नहीं है कि यदि आपके साथ कुछ गलत हो रहा है तो आपने कुछ बुरे कर्म किए हैं। बल्कि ऐसे समय में आपको यह सोचना चाहिए कि अगर आपके साथ कुछ बुरा हो रहा है तो जल्द ही आपके साथ कुछ अच्छा भी होगा इसलिए उस समय का आपको इंतजार करना चाहिए जब आपकी ज़िंदगी में खुशियां आएंगी। इसके साथ साथ आपको अपने कर्तव्यों का पालन पूरी इमानदारी और मेहनत से करना चाहिए।
ज्यादातर ऐसे लोगों की जिंदगी बहुत अजीब होती है या तो परिवार के लोग उन्हें उपेक्षा की दृष्टि से देखते हैं या फिर परिवार के लोग उनसे बहुत अधिक उम्मीद रखते हैं और उम्मीद पूरी ना होने पर उन्हें जिम्मेदार ठहराते हैं। ऐसा होने पर यह लोग बहुत ज्यादा दुखी हो जाते हैं।
वहीं दूसरी तरफ कई लोग ऐसे होते हैं जिंहें परिवार में बहुत अधिक मान सम्मान मिलता है उन्हें जिंदगी के सारे ऐश और आराम मिलते हैं जबकि इन सब को पाने के लिए उन्होंने कुछ खास मेहनत नहीं की होती। इसका मतलब यह होता है कि उनके पूर्वजों ने कुछ अच्छे कर्म किए होंगे जिसका फल उन्हें मिल रहा है।

ऐसे में जो लोग बुरी परिस्थितियों से गुजरते हैं उन्हें खुद को हर परिस्थिति में डालने की आदत हो जाती है। इसलिए यदि आपके साथ बहुत अधिक बुरा हो रहा है तो आप यह ना सोचो कि आप बुरे हैं बल्कि आप को यह सोचना चाहिए कि आप हर परिस्थिति में ढल रहे हैं। इसके विपरीत यदि आपको बेवजह प्रशंसा और मान मिल जाए तो आपको अधिक खुश नहीं होना चाहिए क्योंकि वास्तविक में आपकी प्रशंसा आपके पूर्वजों की मेहनत का फल है।

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