इन पांच राशियों पर मंडरा रहा है शनिदेव का बुरा साया, नहीं किया ये उपाय तो भुगतना पड़ सकता है इसका अंजाम

इसमें कोई दोराय नहीं कि हर व्यक्ति की कुंडली में नौ ग्रह होते है और इनमे से शनि ग्रह एक ऐसा ग्रह है जिसे पापी ग्रह के नाम से भी जाना जाता है. इसके इलावा राहु और केतु को भी पापी ग्रह के रूप में स्थान दिया गया है. वो इसलिए क्यूकि ये तीन ग्रह जिसकी भी कुंडली में जाते है उसके जीवन में उथल पुथल मच ही जाती है. इसलिए आज हम आपको शनि की साढ़े साती, इसकी ढैय्या और शनि के चक्र के बारे में कुछ खास जानकारी देना चाहते है. इसके साथ ही हम आपको ये भी बताएंगे कि इस बार शनि कौन सी राशियों पर हावी होगा.
अगर ज्योतिष शास्त्र की माने तो शनि ग्रह बड़ी धीमी चाल से चलता है और यदि ये किसी की कुंडली में आ जाएँ तो ढाई दिन तक उसकी कुंडली में रहता है. ऐसे में जिस व्यक्ति की कुंडली में ये ग्रह टिकता है, उसे थोड़े थोड़े समय में नुक्सान होना लाजिमी है. आपकी जानकारी के लिए बता दे कि शनि की कुल दशा उन्नीस वर्ष तक होती है और इसके साथ ही यदि इसमें साढ़े साती और दो ढैय्या का समय जोड़ दिया जाए तो शनि किसी भी व्यक्ति के जीवन को करीब इक्कतीस वर्ष तक प्रभावित करता है.
अगर हम सीधे शब्दों में कहे तो यदि आपकी राशि में इस समय शनि की साढ़े साती या ढैय्या चल रही है तो यह खत्म होने के तीस या इक्कतीस वर्ष बाद यक़ीनन दोबारा वापिस आएगी. इसमें कोई शक नहीं कि शनिदेव जब वापिस आते है तो व्यक्ति को किसी न किसी प्रकार का नुकसान तो जरूर होता है और यही वजह है कि लोग शनि ग्रह से ज्यादा डरते है. इसके इलावा शास्त्रों में ये भी कहा जाता है, कि शनि की दशा चल रही हो या न चल रही हो, लेकिन फिर भी शनि की क्रूर दृष्टि हर व्यक्ति पर रहती है.
वैसे शनि को कर्मफल दाता के रूप में भी जाना जाता है, जो समय आने पर इंसान को उसके बुरे कामो का फल जरूर देते है. जी हां भले ही थोड़ी देर हो जाए लेकिन इंसान को बुरे कामो का फल जरूर मिलता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ऐसा कहा जाता है, कि शनिदेव टेढ़ी नजर वाले है और ऐसे में यदि वो किसी एक राशि पर टिक जाए तो इसका असर उसके आस पास की राशियों पर भी पड़ता है. तो चलिए अब आपको बताते है कि शनि की ढैय्या और साढ़े साती किन राशियों को प्रभावित करने वाली है.
१. धनु राशि.. बता दे कि शनि ग्रह फ़िलहाल धनु राशि में मौजूद है और ऐसे में धनु राशि के साथ साथ वृश्चिक और मकर राशि वालो पर भी शनिदेव की क्रूर दृष्टि बनी रहेगी. इसके साथ ही हम बता दे कि यदि इन तीन राशियों ने जल्द से जल्द कोई उपाय नहीं किया या शनिदेव को खुश करने की कोशिश नहीं की तो इनकी मुसीबते बढ़ सकती है.
२. वृषभ और कन्या.. बता दे कि इन दो राशियों पर भी शनि की ढैय्या चल रही है. ऐसे में इन सभी राशियों को शनि से संबंधित कोई न कोई उपाय तो जरूर कर लेना चाहिए.
बरहलाल अगर आप शनि की क्रूर दृष्टि से बचना चाहते है, तो हम आपको इसके उपाय भी बता देते है. जी हां यदि आप शनिदेव को प्रसन्न करना चाहते है या शनि की साढ़े साती और ढैय्या से बचना चाहते है तो शनि बीज मन्त्र यानि ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः का रोज 108 बार जाप करे. इसके इलावा शनि स्तोत्रः का जप भी कर सकते है. जो इस प्रकार है. नमस्ते कोण संस्थाय पिंगलाय नमोस्तुते. नमस्ते विष्णु रूपाय कृष्णाय च नमोस्तुते. नमस्ते रौद्र देहाय नमस्ते कालकायजे. नमस्ते यम संज्ञाय शनैश्चर नमोस्तुते. प्रसादं कुरु देवेश दीनस्य प्रणतस्य च.
गौरतलब है कि काले घोड़े की नाल या नाव की कील से बनी हुई अंगूठी को अपने दाए हाथ की मध्यमा अंगुली में शनिवार के दिन सुबह शनि बीज मंत्र का 108 बार जाप करने के बाद ही धारण करे. इसके साथ ही इस बात का ध्यान रखे कि उस अंगूठी को शुक्रवार की रात को ही सरसो के तेल में डुबो कर रख दे और अंगूठी धारण करने के बाद उसी तेल से एक दीपक जला दे. इसके इलावा यदि कोई व्यक्ति ये सब उपाय करने में सक्षम नहीं है तो वो हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ भी कर सकता है और उसे करना भी चाहिए.
इसके इलावा शनि के प्रकोप से बचने के लिए रोज सुंदरकांड का पाठ जरूर करे. यहाँ तक कि शिव आरधना से भी शनि प्रकोप से काफी हद तक छुटकारा मिल सकता है. गौरतलब है कि अभी जो उपाय हम आपको बताने वाले है वो विस्तारित जरूर है लेकिन शनि बीज मन्त्र और स्तोत्र के बाद इसका पाठ करने से शनि देव काफी प्रसन्न होते है. जी हां यदि कुंडली में शनि की स्थिति खराब हो तब भी इसका उच्चारण करने से राहत मिलती है. बता दे कि आपको केवल शनि मृत्युंजय स्तोत्रः का पाठ करना है.

बरहलाल यदि हमारे द्वारा बताये गए उपायों में से आप रोज केवल दो उपाय भी कर लेते है तो आपके ऊपर मंडरा रहा शनिदेव का साया कम हो जाएगा.

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