जन्म से ही शापित माने जाते हैं ऐसे व्यक्ति, चैन की जिंदगी तो दूर सांस लेना भी हो जाता है दुश्वार

कई बार आपने सुना होगा होगा की अक्सर लोग किसी को बहुत बुरा भला कहते है और ऐसा मानते है की उसी की वजह से वहाँ के लोगों का और आसपास का हमेशा बुरा ही होता रहता है और ऐसा कहते हुए लोग उसे शापित या फिर अन्य ऐसे ही नामों से पुकारते है और कभी कभी तो उसकी पिटाई भी कर देते है।
ऐसा कहा जाता है की इन शापों के कारण उस व्यक्ति की कभी भी उन्नति नहीं हो पाती है ना ही उसे पुरुषार्थ का फल प्राप्त होता। यह भी माना जाता है की इनहि सब की वजह से उसकी संतान जीवित नहीं रहती और जाने क्या क्या तमाम सारी बातें। आपको बता दे की इन सब बुरे प्रभावों की सबसे बड़ी वजह होती है शापित कुंडलियां। ऐसा कहा जाता है की इन शापित कुंडलियों में त्रिशूल योग के आधार पर कालसर्प योग की तरफ ज्योतिष विद्वानों ने अपनी जानकारी के अनुसार यह पाया है की इन दोनों कुंडलियों में काफी हद तक समानता पाई जाती है।
आपको बता दे की ‘कालसर्प योग’ वृषभ, मिथुन, कन्या एवं तुला लग्र के जातकों को विशेष रूप से प्रभावित करता है तथा अगर कुंडली में राहु अष्टम स्थान में और केतु द्वितीय स्थान में हो तो कहा जाता है की ऐसी स्थिति में यदि ‘कालसर्प योग’ बने तो यह ‘योग’ बेहद ही कष्टकारक होता है। शास्त्रों के अनुसार ऐसे जातकों को सपने में अक्सर सांप दिखाई देते हैं जिससे वो गहरी नींद में भी होने के बावजूद डर के मारे उठ बैठता है। बता दे की जिस भी जातक की कुंडली में ऐसे लक्षण होते है उस व्यक्ति को इस ग्रहण के अशुभ फल भोगने पड़ते हैं। शास्त्रों मे बताया गया है की राहु-केतु के साथ रहने वाले चंद्र या रवि के अंश से 7 अंश में अधिक हो तो उस जातक की कुंडली में अशुभ फलों की तीव्रता क्षीण हो जाती है।

जिस व्यक्ति के जन्मांग में कालसर्प योग हो उस व्यक्ति को अपने जीवनकाल में अनेक उतार-चढ़ाव देखने पड़ते हैं साथ ही उसे तकरीबन सभी तरह के भौतिक सुखों से वंचित रहना पड़ता है और सिर्फ इतना ही नहीं उसे इतनी सारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है की उसका सुख-चैन सब कुछ उसके लिए दूभर हो जाता है।

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