अगर आपको भी दिखता है चांद की एसी आकृति तो मौत का समय है निकट

जन्म के साथ ही मृत्यु भी सत्य है, वेद, ग्रन्थ और पौराणिक साहित्यों में इसकी व्याख्या वैज्ञानिक तरीके से मिलती है। कुंडली के आधार पर मृत्यु का समय काल दिन सब निश्चित है। ये तो रही तकनीक की बात, लेकिन व्यवहारिक स्तर पर भी ये जाना जा सकता है की मृत्यु का समय कब है। आने से पहले मृत्यु भी आहट देती है। निम्नलिखत लक्षणों से ये पता लगाया जा सकता है कि इस संसार में अब समय पूरा हो गया है।
चाँद की आकृति विखंडित दिखाई देना:-
पूर्णिमा की रात को पूरा चाँद दिखाई देता है। धीरे धीरे इसका आकार घटता जाता है। अमावस्या को ये न के बराबर दिखाई देता है। ये सामान्य प्रक्रिया है। लेकिन अगर किसी को चाँद विखंडित या टेढ़ा मेढ़ा दिखाई दे तो ये समझ लेना चाहिए की दुनिया से विदा लेने का समय आ गया है।

पंच-इन्द्रियों का असामान्य व्यवहार:-
शरीर में उपस्थित पञ्च-इन्द्रियाँ प्राकृतिक स्त्रोत के साथ व्यवस्था स्थापित करती हैं। इस प्रक्रिया से ही हमारा शरीर जीवित रहता है। अगर ये महसूस होने लगे कि हमारी इन्द्रियाँ प्रकृति के विपरीत व्यवहार कर रही हैं तो इसका सीधा मतलब है की सारे जरूरी काम निबटा लिए जाएँ, क्यूँकी विदाई की बेला आ गयी है।

आँखों का अटपटा व्यवहार:-
नज़रें कमजोर होना एक अलग बात है। इसे एक सामन्य प्रक्रिया कहा जा सकता है। लेकिन कभी ऐसा लगे की आंखे अपनी कार्यप्रणाली के अनुरूप कार्य नहीं कर रही तो सचेत होने की ज़रूरत है। आँखों का अजीब बर्ताव मसलन नाक ना दिखाई देना, वस्तु का आकार असमान्य दिखाई देना, अदृश्य आकृति का दिखाई देना। अगर ऐसा है तो ये समझ लेना चाहिए की मौत ने आहट दे दी है।

हर चीज़ का रंग लाल दिखाई देना:-
प्रकाश के माध्यम से, आँखे कुछ प्रक्रिया करके वस्तु का रंग रूप दिखाती हैं। ये प्रकाश सूरज, चाँद या कोई कृत्रिम श्रोत भी हो सकता है, मगर कभी-कभी सभी चीज़े किसी एक विशेष रंग की दिखने लगती है। लाल रंग इनमे प्रमुख है। अगर ऐसा होता है तो ये समझ लेना चाहिए की रंग बिरंगी दुनिया का अध्याय आपके लिए ख़त्म हो गया है।

कान भी देते है मौत का सन्देश:-
कान शरीर का एक विशेष अंग है। सुनने के साथ-साथ ये शरीर की अन्य क्रियाओं में भी सहभागी होता है। जैसे कि मष्तिस्क को स्वच्छ रखना। एक स्वस्थ कान सुई की गिरने की आवाज़ भी सुन सकता है। लेकिन अगर ऐसा होने लगे की आप जोर-जोर से बज रहे नगाड़ों को भी नहीं सुन पा रहे हैं, तो इसका मतलब है कि नियति आपको कुछ और सुनाना चाहती है। वो आपको मौत के आगमन का सन्देश सुना रही है।

शरीर के वाम-अंग का अप्राकृतिक व्यवहार:-
मनुष्य के शरीर का बायां अंग काफी संवेदनशील माना जाता है। ह्रदय भी इसी तरफ होता है। दिमाग से शरीर को संचालित करने वाली अधिकतर् नसें बाईं तरफ ही होती हैं. शरीर का ये भाग, विशेष रूप से हाथ अगर कम्पन्न करने लगे तो इसका तुरंत निवारण करना चाहिए। अगर ये स्थिति एक सप्ताह तक रह गयी तो इसका मतलब है कि शरीर के शांत होने का समय आ गया है।
Previous Post Next Post

.