इस मंदिर मे भगवान के दर्शन के बाद भक्तों को प्रसाद में मिलता हैं पत्ता, कारण जान आप भी हो जायेंगे हैरान



हिन्दू धर्म मे देवी देवताओं की बहुत मन से पुजा की जाती है तथा लोगों के मन मे उनके लिए काफी श्रद्धा रहती है, जिसकी वजह से वो मंदिर आदि मे जाकर उनकी पुजा करते है और कई तरह के अनुष्ठान भी कराते है।  अक्सर लोग दुनिया की तमाम परेशानियों से निजात पाने के लिए और मन की शांति के लिए मंदिर जाया करते है। आपने देखा होगा की जब भी मंदिर मे पुजा समाप्त होती है तो उसके बाद तरह तरह की मिठाई या व्यंजन प्रसाद के रूप में दिया जाता है, लेकिन हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे मे बताने जा रहे है जहां प्रसाद मे ऐसा कुछ मिलता है जिसे जान आप खुद भी हैरान हो जायेंगे।
असल मे इस मंदिर में प्रसाद के रुप में दिए जाते है पेड़ के पत्ते। यह एक ऐसा मंदिर जहां पर प्रसाद के रुप में कोई फल या फूल नही बल्कि पेड़ के पत्ते दिए जाते है, इस मंदिर का नाम है सुरकंडा मंदिर जो देवी के 52 शक्तिपीठों में से एक है। बताया जाता है की यह मंदिर ऋषिकेश से करीब 80 किमी दूर कद्दूखाल के नजदीक है। इस मंदिर तक पहुंचाना इतना आसान भी नहीं है, बताया जाता है की कद्दूखाल से मंदिर तक पहुँचने के लिए दो किमी का पैदल सफर करना पड़ता है।

इस मंदिर की एक खासियत यह है की यह मंदिर वर्ष भर खुला रहता है। कहां जाता है कि जब दक्ष प्रजापति के यज्ञ में शिव को नहीं बुलाया गया, तो सती ने नाराज होकर हवन कुंड में स्वयं की आहुति दी, जिसके बाद शिव सती को कंधों पर लेकर घुमाते रहे। इस दौरान जहां जहां सती का जो अंग गिरा वह स्थान उसी नाम से जाना जाने लगा। ऐसा कहा जाता है की सुरकंडा में माता सती का सिर गिरा था जिस कारण इसका नाम सुरकंडा पड़ा। नवरात्र और गंगा दशहरा के अवसर पर इस मंदिर मे दर्शन करना विशेष माना गया है। यह एक मात्र शक्तिपीठ है जहां गंगा दशहरा पर मेला लगता है।

यह एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां प्रसाद के रूप मे पत्ते दिये जाते है और आपको बता दें कि इस मंदिर में दिए गए पत्तें यहां मौजूद स्थानीय पेड़ के ही होते हैं। प्रसाद के रूप मे मिले इन पत्तों को भक्तजन अपने घरों में रखते हैं। यह पेड़ रौंसली के नाम से जाना जाता है जिसके पत्तों को प्रसाद के रूप में दिया जाता है।
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