दिन के इस पहर में भूलकर भी न जाएं पीपल के पास नहीं तो हमेशा के लिए हो जाएंगे कंगाल



हिन्दू धर्म में पीपल के पेड़ का बहुत महत्व होता है। पीपल के वृक्ष को संस्कृत मे प्लक्ष भी कहा गया है। वैदिक काल मे इसे आश्वार्थ का सम्बोधन भी दिया गया है क्योंकि इसकी छाया मे घोड़ों को बंधा जाता था। अर्थवेद के उपवेद आयुर्वेद मे पीपल के औषधीय गुणो का अनेक असाध्य रोगों मे उपयोग वर्णित है। पीपल के वृक्ष मे जड़ से लेकर पट्टियों तक तैंतीस कोटी देवतायो का वास होता है और इसीलिए पेपल का वृक्ष प्रायः पूजनीय माना गया है। उक्त वृक्ष मे जल अर्पण करने से रोग और शोक दोनों ही मिट जाते है।
इसे न केवल धर्म संसार से जोड़ा गया है, बल्कि वनस्पति विज्ञान और आयुर्वेद के अनुसार भी पीपल को पेड़ कई तरह से फायदेमंद माना गया है। ऐसा माना जाता है कि पीपल के पेड़ में मां लक्ष्मी और भगवान विष्‍णु का वास होता है और पूजा करने से इनकी कृपा मिलती है। लेकिन बहुत कम लोग ही इस बात से अवगत है कि पूरे दिन में एक समय ऐसा भी होता है, जब पीपल के पेड़ के पास नहीं जाना चाहिए। कहा जाता है की उस विशेष समय में वहां पर जाने से व्यक्ति को कई प्रकार की हानि होने लगती है।

हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुसार सूर्योदय के समय पीपल के पेड़ में मां लक्ष्मी और भगवान विष्‍णु का वास होता है, इस समय पीपल के पेड़ में दीपक जलाने से उनकी कृपा मिलती है और कभी भी धन की कमी नहीं होती, जबकि सूर्य अस्त होने के पीपल के पश्चात पेड़ के नीचे मां लक्ष्मी की बड़ी बहन यानी की अलक्ष्मी का वास होता है। ऐसा कहा जाता है की सूर्यास्त के उस समय वहां पर जाने से व्यक्ति अपने साथ दरिद्रता ले आता है।

अक्सर आपने देखा होगा की लोग पीपल और वट के पेड़ की पूजा और परिक्रमा करते है, इनकी पूजा करने के पीछे कुछ कारण होते है। अगर किसी व्यक्ति पर शनि की साढ़े साती चल रही हो तो उसे दोपहर 12 बजे से पहले पीपल के पेड़ की 108 परिक्रमा करनी चाहिए और परिक्रमा के दौरान ही 108 बार कलावा बांधना होता है ऐसा करने से शनि का प्रकोप कम होता है।
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