इस चमत्कारी शिव मंदिर में झाड़ू चढ़ाने से ठीक हो जाती हैं हर तरह की स्किन प्रॉब्लम

भगवान को किसी भी चीज का लालच नहीं होता हैं. आप उन्हें सोना चांदी ना चढ़ाते हुए एक साधारण जल और फुल भी सच्चे मन से चढ़ा देंगे तो वो खुश हो जाते हैं. भगवान की यही बात उन्हें महान बनाती हैं. ऐसे ही एक महान भगवान हैं भोले शिव. वैसे तो देश विदेशों में शिव के कई मंदिर हैं लेकिन आज हम आपको एक ऐसा विशेष मंदिर बताने जा रहे हैं जहाँ भक्तजन भगवान शिव को  फूल और दूध के साथ-साथ, झाड़ू भी सम्पर्पित करते हैं.

शिव पातालेश्वर मंदिर में भेंट की जाती हैं झाड़ू

झाड़ू चढ़ाए जाने कि पीछे यहाँ के लोगो की मान्यता हैं कि ऐसा करने से शिव उनके हर तरह के त्वचा रोग को ठीक कर देते हैं. त्वचा रोग ठीक करने वाला यह चमत्कारी मंदिर मुरादाबाद और आगरा  राजमार्ग पर स्थित छोटे से गाँव सदत्बदी में बना हैं. शिव पातालेश्वर मंदिर नाम से प्रसिद्द इस चमत्कारी जगह में हमेशा भक्त जनो का ताता लगा रहता हैं. इस मंदिर में ज्यादातर वो लोग आते हैं जो त्वचा रोग से ग्रस्त हैं.

शिव को झाड़ू भेंट करने से दूर होते हैं त्वचा रोग

करीब 150 वर्ष पुराने इस मंदिर में भगवान भोलेनाथ की कोई प्रतिमा नहीं बल्कि एक शिवलिंग रखी हैं. यहाँ के स्थानीय लोगो की मान्यता हैं कि इस शिवलिंग पर झाड़ू अर्पित करने से मंदिर की चमत्कारी शक्तियां हर तरह के त्वचा रोग को ठीक कर देती हैं. मंदिर की इस चमत्कारी शक्ति का फायदा उठाने के लिए सोमवार के दिन यहाँ काफी भीड़ रहती हैं.

ये हैं मंदिर के चमत्कार की कहानी

इस मंदिर के चमत्कार के पीछे एक कहानी हैं. गाँव में भिखारीदास नाम का एक अमीर व्यापारी रहता था जो एक तरह के त्वचा रोग से पीड़ित था. उसके शरीर पर काले धब्बे थे जो काफी दर्द उत्पन्न करते थे.
एक दिन भिखारीदास उपचार के लिए गाँव के वैद के पास जा रहा था, तभी उसे जोर की प्यास लगी और वो पास ही के एक आश्रम में रुक गया. यहाँ आश्रम में सफाई कर रहे महंत की झाड़ू भिखारीदास को गलती से लग गई. झाड़ू का स्पर्श पाते ही भिखारीदास की स्किन प्रॉब्लम ख़त्म हो गई. जब उसने महंत से इस चमत्कार के बारे में पूछा तो उसने बताया कि वो भगवान शिव का प्रबल भक्त हैं. यह सब उसी की शक्तियों का कमाल हैं.
इस बात से प्रसन्न होकर भिखारीदास ने महंत को सोने से भरी एक पोटली दी. महंत ने पोटली लेने से इनकार कर दिया और कहा कि आप सच में कोई धर्म का काम करना चाहते हैं तो इस जगह पर शिव का मंदिर बनवा दे. भिखारीदास ने ऐसा ही किया और तब से इस मंदिर में हजारों की तादाद में भक्त जन आने लगे.
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