हो सकती है भगवान् शिव की प्राप्ति, यदि एक बार संकल्प लेकर करे इस मन्त्र का जाप !



धार्मिक शास्त्रों के अनुसार सभी देवताओ में से केवल भगवान् शिव ही एक ऐसे देवता है, जो मात्र एक लोटा जल अर्पित करने से ही प्रसन्न हो जाते है. साथ ही मनचाहा फल भी दे देते है. बरहलाल आज हम आपको भगवान् शिव के ऐसे मन्त्र के बारे में बताएंगे जिसके बाद आप भगवान शिव की भी प्राप्ति कर सकते है. तो चलिए अब हम आपको बताते है, कि आपको ये पूजा कैसे करनी है. गौरतलब है, कि भोलेनाथ की पूजा करने के लिए सबसे पहले एक शिवलिंग का निर्माण करना होगा.
इसके लिए श्मशान की मिटटी, भस्म, काली गाय का गोबर, दूध या घी, शहद, बिल्वपत्र, धतूरा, फल, स्वेतार्क के फूल, भांग, रुद्राक्ष की माला और लाल वस्त्र ले. इसके बाद जहाँ शिवलिंग स्थापित करना है, उस जगह को गोबर से लिप कर अच्छी तरह पवित्र कर ले. फिर स्नान करने के बाद मिटटी, भस्म और गोबर में गंगाजल मिला कर सोलह इंच लम्बे और पांच इंच मोटाई के आकर के आकर के शिवलिंग का निर्माण करे. बता दे कि भगवान् शिव की यह पूजा पूर्णिमा को शुरू करनी है. इसलिए पहले से ही ज्योतिष से इसका मुहूर्त निकलवा ले.
फिर पूजा में सबसे पहले श्रीगणेश, माता पार्वती और अपने गुरु की पूजा करके उनका आशीर्वाद ले. इसके बाद उत्तर दिशा की तरफ मुँह करके पीले आसन पर बैठे और कितने जाप करने है, उसका संकल्प ले ले. गौरतलब है, कि ये पूरा विधान पांच लाख जप से होता है. इसके बाद गुरुमंत्र की चार माला का जाप करे. फिर श्रीगणेश की स्थापना सुपारी में कलावा लपेट दे और पूजन सम्पन्न करे. इसके इलावा अपनी दायी तरफ भैरव की स्थापना करे. ऐसे में यदि भैरव यंत्र है, तो ये बहुत शुभ रहेगा. मगर यदि नहीं है तो आप सुपारी का ही उपयोग कर सकते है.
इसके बाद भगवान् भैरव की पूजा सिंदूर और लाल फूल से करे. फिर गुड़ का भोग लगाएं. इसके साथ ही भैरव बाबा के सामने सरसो के तेल का दीपक प्रज्वलित करे. बता दे कि यह दीपक तब तक प्रज्वलित रहना चाहिए जब तक आपका मन्त्र जप पूरा न हो जाएँ. इसके बाद अपने बाई तरफ एक घी का दीपक प्रज्वलित करे. गौरतलब है, कि यह दीपक भी साधना काल में अखंड प्रज्वलित रहे. फिर इस मन्त्र का जप करते हुए भगवान् शिव की पूजा करे.
ध्यायेनिन्त्य महेशं रजतगिरिनिभं चारुचंद्रावतंसं,
रत्नाकल्पोज्ज्वलाङ्ग परशुमृगवराभीति हस्तं प्रसन्नम !
पद्दासीनं समन्तात स्तुतममरगणेव्याघ्रकृतितं वसानं,
विश्ववाध्यम विश्ववध्यम निखिल भयहरं पञ्चवकंत्र त्रिनेत्रं !
ॐ श्री उमामहेश्वराभ्यां नम: आवाहयामि. स्थापयामि पूजयामि !
इस मन्त्र के जप के बाद पंचामृत, गंगाजल, फूल और नेवैध्य आदि से भोलेनाथ का पूजन करे. फिर पंचमुखी रुद्राक्ष की छोटी दानो वाली माला भोलेनाथ को पहनाएं और दूसरी माला से जप करे. गौरतलब है, कि साधना के बाद यह माला दिव्य हो जायेगी. इसके बाद एक पाठ रुद्राष्टक का करे और मन्त्र जप की सिद्धि के लिए प्रार्थना करे. फिर अपनी संकल्प शक्ति के अनुसार ॐ नम: शिवाय मंत्र का जप करे. अब मन्त्र जाप पूरा होने के बाद एक पाठ रुद्राष्टक का और दोबारा गुरु मन्त्र का करे.

बता दे कि आपको पूरा दिन यही क्रम करना है. गौरतलब है, कि मन्त्र साधना में पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन और भूमिशयन करे. दरअसल यह एक अघोर साधना है. ऐसे में इसके लिए किसी कुशल गुरु का होना जरुरी है. इसके इलावा यह साधना पूर्णिमा से शुरू करके संकल्प पूरा होने तक करनी है. इसलिए इस साधना का संकल्प सोच समझ कर ले, क्यूकि यह बीच में टूटनी नहीं चाहिए.

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