पूजा के दौरान महिलाओं को नहीं लगानी चाहिए माथे पर बिंदी, वजह जानकर आप भी हो जाएंगे परेशान

आपने देखा होगा की पुजा-पाठ या फिर किसी त्योहार के दौरान अक्सर महिलाएं काफी साज-धज के तैयार होती है और माथे पर बिंदियां भी जरूर लगाती हैं। हालांकि यह तो सदियों से परंपरा चली आ रही है की हर सुहागन स्त्री अपनी मांग में सिंदूर और माथे पर बिंदी जरूर लगाए मगर जमाने के अधुङ्कि होने के साथ साथ फैशन आदि में अविवाहित लड़कियां भी बिंदिया वैगरे लगा कर सजती सँवरती है और हर तरह के पुजा-पाठ में शामिल होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस तरह आपको पूजा का फल नहीं मिलता।

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि सौभाग्य वृद्धि के लिए लगाया जाने वाली बिंदी, पूजा से मिलने वाले लाभदायक फल को नष्ट कर सकती है। इसके पीछे की कुछ विशेष वजह भी बताया गया है, जैसे कि हम जानते है की बिंदी हमेशा दोनों भौंहों के बीच लगाई जाती है। बताना चाहेंगे की योग विज्ञान में इस स्थान को आज्ञा चक्र के नाम से जाना जाता है और यहीं पर शरीर की तीन प्रमुख नाडियां इड़ा, पिंगला और सुषुम्ना मिलती है।
यही वजह है की अपने कई लोगों से सुना होगा की आध्यात्मिक सोच के लिए माथे का यह स्थान काफी महत्वपूर्ण होता है।बताना चाहेंगे की जब इस चक्र पर किसी भी तरह का अवरोध उत्पन्न होता है तो व्यक्ति का ध्यान स्थिर नहीं हो पाता है जिसकी वजह से पूजा का उचित फल नहीं प्राप्त हो पता है साथ ही आप को पुजा के बाद जो शांति का एहसाश होना चाहिए वह नही प्राप्त हो पाता है।

इसलिए जानकार लोगों का मानना है कि पूजा के दौरान कभी भी बिंदी का प्रयोग नहीं करना चाइए। हालांकि किसी उत्सव या त्योहार के दौरान अगर आप बिंदी का इस्तेमाल करती है तो इससे कोई समस्या नहीं है मगर जब भी कभी आप पूजा पर बैठें तो इसे माथे से निकाल देना ही ज्यादा उचित होगा।

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