एकादशी के दिन भूलकर भी न खाएं ये चीजें वरना बन जाएंगे पाप के हकदार

भगवान विष्णु के व्रत में सबसे महत्वपूर्ण व्रत एकादशी माना जाता है। एकादशी साल में 14 बार पडती हैं। शास्त्रों के अनुसार माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने से दूसरे एकादशी की पूर्ति हो जाती है और इसी के अनुसार फल की प्राप्ति होती है। वहीं ये भी माना जाता है कि एकादशी के दिन एक भूल भी शुभ फल से वंचित कर सकती है। इस दिन कुछ ऐसी चीजें हैं, जिनका सेवन करना नुकसानदेय माना जाता है। एकादशी में भूलकर भी इन चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके पीछे धार्म‌िक कारण के साथ ही साथ वैज्ञान‌िक कारण भी बताया जाता है।
माना जाता है कि इस व्रत में चावल का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके पीछे का कारण बताया जाता है कि माता शक्ति के क्रोध से बचने के लिए महर्षि मेधा ने शरीर का त्याग कर दिया और उनका अंश पृथ्वी में समा गया। चावल और जौ के रूप में महर्षि मेधा उत्पन्न हुए इसलिए चावल और जौ को जीव माना जाता है।
इस दिन लहसुन, प्याज का सेवन करना भी वर्जित है इसके पीछे का कारण बताया जाता है कि इसे खाने से गंध युक्त और मन में काम भाव बढ़ाने की क्षमता के कारण अशुद्ध माना गया है।

वहीं इसके साथ ही इस दिन बैंगन, सेम, मांस और मदिरा का सेवन खाना अशुभ होता है। अंडा नहीं खाएं और झूठ, ठगी आदि का त्याग कर दें। कहा जाता है कि इस दिन सेम खाने से संतान के लिए हानिकारक हो सकता है। वहीं, मांस-मदिरा का सेवन करने वाले को नर्क की यातनाएं झेलनी पड़ती हैं।

वहीं अगर इसके वैज्ञनिक तथ्‍य पर बात करें तो चावल में जल तत्व की मात्रा अधिक होती है। जल पर चन्द्रमा का प्रभाव अधिक पड़ता है। चावल खाने से शरीर में जल की मात्रा बढ़ती है इससे मन विचलित और चंचल होता है। मन के चंचल होने से व्रत के नियमों का पालन करने में बाधा आती है। एकादशी व्रत में मन का निग्रह और सात्विक भाव का पालन अति आवश्यक होता है इसलिए एकादशी के दिन चावल से बनी चीजें खाना वर्जित कहा गया है।
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