गायब बेटे के लौटने की आस में पथरा गई है बूढ़ी मां की आंखें

संग्रामपुर में घर से तीन वर्षो पूर्व गायब हुए 26 वर्षीय पुत्र रमेश के आने की प्रतीक्षा में उसकी 70 वर्षीया मां रामरति की आंखें अब पथरा चुकी हैं। उसे आज भी विश्वास है कि उसका पुत्र जरूर लौट कर आएगा। रामरति प्रखंड मुख्यालय के पश्चिमी संग्रामपुर गांव की निवासी है। उसके पति प्रेमचंद साह की 40 वर्ष पूर्व डूबने से मौत हो गई। दो बेटों के पालन-पोषण की जबाबदेही आते ही वह पूरी तरह टूट चुकी थी। लेकिन, हार नहीं मानते हुए लोगों के खेतों में मजदूरी कर दोनों का पालन-पोषण किया। लेकिन, जैसे ही उसका बड़ा पुत्र उमेश होश संभाला, इसे छोड़ कर संग्रामपुर बाजार में मिठाई दुकान खोल ली। 
मां को छोड़ वह अपने बाल-बच्चों के साथ अकेला रहने लगा। लेकिन, इसी बीच रमेश भी अचानक घर से गायब हो गया। बुढ़ापे का सहारा बने 30 वर्षीय रमेश के लापता होने के बाद वह अब पूरी तरह टूट चुकी है। रामरति संग्रामपुर थाना गेट के समीप खोमचे पर प्रतिदिन दुकान लगाकर बिस्किट व चॉकलेट बेच कर अपनी परवरिश करती है। साथ ही दुकान पर आने वाले लोगों व ग्राहकों को एकटक नजरों से देखते हुए यह पूछ पड़ती है कि उसका गुम हुआ बेटा कहीं किसी को नजर आया था क्या? उसे यह मलाल है कि गुम हुए बेटे को ढूंढने के लिए उसके बड़े बेटे ने कोई मदद नहीं की। यदि वह प्रयास किया होता तो शायद उसके बुढ़ापे का सहारा जरूर लौट कर आ गया होता। मिठाई दुकानदार रामायण साह ने बताया कि तीन वर्षो से वह बेटे के लिए सुबह-शाम रोती रहती हैं।
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