सवारियों से भरी बस की गई जब्त, रात भर ठंड में ठिठुरती रहीं महिलाएं और सभी बच्चे

आरटीए ने सोमवार रात करीब दस बजे एक स्लीपर बस को 50 सवारियों समेत ही इंपाउंड कर पानीपत डिपो की वर्कशॉप में खड़ा कर दिया। बस मालिक पर 51 हजार रुपये का जुर्माना लगाया और मंगलवार की सुबह 10 बजे जुर्माना वसूलने के बाद बस को छोड़ा गया। इस दौरान 12 घंटे तक सवारी बस में मौजूद महिला, बुजुर्ग और बच्चा सवारी सात डिग्री सेल्सियस की ठंड में ठिठुरते रहे।
वहीं मंगलवार सुबह 50 हजार रुपए से ज्यादा जुर्माना भरने पर बस को छोड़ दिया गया। बताया गया कि रात को करीब 10.30 बजे बस कोवर्कशाप में खड़ा किया था और सुबह 10.15 पर उसे वर्कशाप से बाहर निकाला गया। बस के इम्पाऊंड करने पर करीब 12 घंटे तक यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं इस बारे में आर.टी.ए. के सहायक सचिव शम्मी शर्मा ने बताया कि बस चालक के पास कागजात नहीं मिलने पर इम्पाउंड किया गया था और मंगलवार को उन्होंने 50 हजार रुपए से ज्यादा जुर्माना भर दिया और बस को छोड़ दिया गया।

बस को इम्पाऊंड करने के बाद उसमें बैठे यात्री पुरी तरह से परेशान रहे। ठंड के चलते यात्रियों को ओर भी परेशानी उठानी पड़ी। वर्कशॉप में खड़ी बस में सवारियों की तरफ किसी अधिकारी ने कोई ध्यान नहीं दिया और उनके लिए दूसरी बस का प्रबंध किया। बताया जाता है कि यात्रियों ने अधिकारियों के सामने बस इम्पाऊंड करने के बाद दूसरी बस या फिर अन्य कोई प्रबंध करने की बात कही, लेकिन अधिकारी उदासीन बने रहे। नतीजा यह रहा कि बस में सवार यात्रियों को पूरी रात बस में ही गुजारनी पड़ी। बस में छोटे बच्चे, महिलाएं समेत बुजुर्ग यात्री भी थे, सुरक्षा की दृष्टि से भी इनका प्रबंध किया जाना था क्योंकि रात के समय कोई अप्रिय घटना भी घटित हो सकती थी। 

वैसे यह भी मामला बनाया जा सकता था बस के कागजात अपने पास रखकर बस को जाने देते, और उसके बाद उससे जुर्माना वसूला जाता। यह बात यात्रियों ने भी कही थी कि अपने ड्राइवर और पुलिस को साथ में भेजकर यात्रियों को निर्धारित जगह छोड़कर बस को वापस ला सकते थे। इस बार में आरटीए सह सचिव शम्मी शर्मा ने बताया कि उन्होंने बस के कागजात अधूरे होने पर उसे बंद किया था। प्राइवेट बस चालक को ही चालान भरने या सवारियों के लिए दूसरी बस का इंतजाम करने के लिए भी कहा गया था। जब ए.सी.एस. एस.एन. रॉय से इस बारें में बात की गई तो उन्होंने इस बारे में ट्रांसपोर्ट कमीशन से बात करने के लिए कहा।
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