भगवान कुबेर से जुड़ी कुछ पौराणिक बातें, जो आप भी नहीं जानते होंगे

भगवान कुबेर पिछले जन्म में ‘चोर’थे !
जहां माता लक्ष्मी की पूजा हम धन की देवी के रुप में करते हैं तो धन के देवता के रुप में हम कुबेर को पूजते हैं। कहते हैं कि अगर मां लक्ष्मी के साथ ही कुबेर देव की पूजा की जाए तो बहुत जल्दी व्यक्ति की किस्मत बदल सकती है। आपने भगवान राम,कृष्ण, गणेश जैसे कई देवताओं के प्रादुर्भाव के बारे में तो जरुर सुना होगा, लेकिन क्या आपको मालूम है कि भगवान कुबेर धन के देवता कैसे कहलाए। हम बताएंगे आपको उनके कुबेर बनने की पूरी कहानी।
कैसे बने कुबेर धन के देवता
प्रचलित पौराणिक कथाओं की मानें तो कुबेर पूर्व जन्म में चोर थे। एक रात कुबेर भगवान शिव के मंदिर में चोरी करने गए। उस जमाने के मंदिरों में खूब खजाना हुआ करता था। मंदिर में अंधेरे की वजह से कुबेर को कुछ भी दिख नहीं रहा था। तब उन्होंने चोरी करने के लिए एक दीपक जलाया, दीपक की रौशनी में उन्हें मंदिर कीधन-संपत्ति साफ-साफ दिखाई देने लगी। जिसे देखकर उनका मन और भी लालच से भर गया। कुबेर देव मंदिर का सामान चोरी कर ही रहे थे कि हवा से दीपक बुझ गया। कुबेर ने दोबारा दीपक जलाया. लेकिन तेज हवा की वजह से उनका दीपक फिर बुझ गया। इसके बाद कुबेर ने फिर रौशनी की, लेकिन दीपक फिर बुझ गया। ऐसे में लालच से भरे कुबेर देव ने उतनी बार दीपक जलाया जितनी बार वो बुझा। कहा जाता है कि अगर रात में भगवान शिव के सामने दीपक जलाया जाए तो भगवान शिव बेहद प्रसन्न होते हैं। तो कुबेर देव ने गलती से ही सही लेकिन रात को भगवान शिव के आगे दीपक जलाया, जिससे भगवान शिव कुबेर देव से बहुत खुश हुए और उन्हें अगल जन्म में देवताओं का कोषाध्यक्ष बनने का वरदान दे डाला ।
भगवान कुबेर का स्वरुप
कुबेर के संबंध में प्रचलित है कि उनके तीन पैर और आठ दांत हैं। ग्रंथों के अनुसार कुबेरदेव का पेट बड़ा है। इनके शरीर का रंग पीला है। ये किरीट, मुकुट आदि आभूषण धारण करते हैं। एक हाथ में गदा तो दूसरा हाथ धन देने वाली मुद्रा में रहता है। इनका वाहन पुष्पक विमान है।
कुबेर देवता की उत्पति का जिक्र मार्कण्डेय और वायु पुराण में है। जिसमें ‘कु’ का मतलब ‘निंदा’ हैं और ‘बेर’का अर्थ ‘शरीर’ है। कुत्सित शरीर धारण करने के कारण यह कुबेर कहलाए। शास्त्रों में बताया गया है कि इन्हें यम, वरुण और इंद्र देवता की तरह चौथे लोकपाल और उत्तर दिशा का स्वामी बनाया गया था। इन्हें धन और यज्ञ का भी स्वामी माना जाता है।
भगवान कुबेर से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां
पिता- विश्रवा मुनि
माता- इड़विड़ा
सौतेली माता- कैकसी
सौतेले भाई- रावण, कुंभकर्ण, विभीषण
पत्नी- भद्रा
पुत्र- मणिग्रीव और नलकुबेर
पूजा का विशेष दिन- धनत्रयोदशी और दीपावली
शस्त्र- खड्ग, त्रिशूल, गदा
राजधानी- अलकापुरी, विभावरी
शक्तियां- वृद्धि तथा ऋद्धि
सेनापति- मणिभद्र, पूर्णभद्र,
मणिमत्, मणिकंधर, मणिभूष, मणिस्त्रिग्विन,मणिकार्मुकधारक
बेलपत्र से कुबेर की पूजा करने से कुबेर देवता जल्दी प्रसन्न होते हैं। कार्तिक मास की कृष्ण त्रयोदशी को कुबेर देवता का पूजन किया जाता है। इस त्योहार को धनतेरस के रूप मनाया जाता है। इस दिन चांदी या तांबे का बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है।
कुबेर मंत्र “ॐ ह्रीं श्रीम ह्रीं कुबेराय नम:” का जाप करने से भगवान कुबेर की असीम अनुकंपा प्राप्त होती है। लेकिन ध्यान रहे कुबेर मंत्र की गलत स्थापना का नकारात्मक प्रभाव भी होता है।
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