प्रधानमंत्री ने कोरोना को लेकर मुख्यमंत्रियों से की चर्चा, कहा- सामूहिक प्रयास से मिला लाभ

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश में कोरोना वायरस को लेकर  एक बार फिर से मुख्यमंत्रियों से चर्चा की। सोमवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए हुई इस बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा कि सभी के सामूहिक प्रयासों के अलावा लॉकडाउन का जो प्रभाव पड़ा है उसका लाभ देखने को मिल रहा है। बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हजारों जिंदगियां बचाने के लिए यह प्रयास महत्वपूर्ण हैं।  पहले लॉकडाउन में सख्ती और दूसरी में कुछ ढील देने से अनुभव प्राप्त हुआ। इस दौरान राज्यों में अच्छा काम हुआ है। लगातार एक्सपर्ट्स के सुझाव मिल रहे हैं। अब मनरेगा समेत कई उद्योग का काम भी शुरू हो गया है। 
प्रधानमंत्री के साथ सोमवार को लगभग तीन घंटे चली वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान  राज्यों औऱ केंद्र शासित प्रदेशों में कोरोना संक्रमण की स्थिति और कंटेनमेंट जोन के लिए उठाए गए कदमों की चर्चा की। समय की कमी की वजह से सिर्फ नौ मुख्यमंत्रियों ने प्रधानमंत्री से बात की। वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान गृहमंत्री अमित शाह और स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन के अलावा प्रधानमंत्री कार्यालय के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। बैठक में मेघालय, मिजोरम, पुड्डुचेरी, उत्तराखंड, ओडिशा, बिहार, गुजरात और हरियाणा आदि मुख्यमंत्रियों को बोलने का मौका मिला। वहीं अन्य मुख्यमंत्रियों से अपने सुझाव लिखित में देने के लिए कहा गया। लगभग दर्जन भर से ज्यादा मुख्यमंत्रियों ने लॉकडाउन की अविध को बढ़ाने का सुझाव दिया। बैठक में मेघालय के मुख्यमंत्री संगमा ने कहा कि तीन मई के बाद भी राज्य लॉकडाउन को जारी रखना चाहता है। इसके तहत अंतर-राज्यीय और अंतर-जिला गतिविधियों पर प्रतिबंध जारी रहेगा। बैठक के दौरान मिजोरम के मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार जो भी फैसला लेगी उसे राज्य स्वीकार करेगा। पुड्डुचेरी के मुख्यमंत्री वी.नारायणसामी ने राज्य के कोरोना योद्धाओं के लिए व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण और अन्य चिकित्सा सामग्री प्रदान करने के बात केंद्र से कही। उन्होंने 3 मई को लॉकडाउन खत्म होने पर उद्योगों को शुरू करने की इच्छा जाहिर की और कोरोना-19 से लड़ने के लिए भारत सरकार से वित्तीय सहायता की मांग की। वहीं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने त्रिवेंद्र रावत ने बताया कि राज्य के आर्थिक पुनरुद्धार के लिए मंत्रियों की एक समिति और विशेषज्ञों की एक समिति का गठन किया गया है। मुख्यमंत्री ने यह सुझाव दिया कि मनरेगा मजदूरी रोजगार की अवधि वर्तमान 100 दिनों से बढ़ाकर 150 दिन कर दी जाए। उन्होंने यह भी कहा कि पर्यटन और तीर्थयात्री लॉकडाउन से बहुत प्रभावित हुए हैं। इनके अलावा बैठक में शामिल होने वाले मुख्यमंत्रियों में अरविंद केजरीवाल (दिल्ली), पिनराई विजयन (केरल), उद्धव ठाकरे (महाराष्ट्र), ई.के पलानीस्वामी (तमिलनाडु), बी.एस.येदियुरप्पा (कर्नाटक) व आदित्यनाथ (उत्तर प्रदेश),  मनोहर लाल खट्टर (हरियाणा), अशोक गहलात (राजस्थान), ममता बनर्जी (पश्चिम बंगाल), के. चंद्रशेखर राव (तेलंगाना), जयराम ठाकुर (हिमाचल प्रदेश) विजय रुपाणी (गुजरात) , शिवराज सिंह (मध्य प्रदेश) आदि शामिल थे। बैठक में प्रधानमंत्री सफेद औऱ हरे रंग के बार्डर वाले गमछे से अपना मुंह ढंके हुए दिखाई दिए। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्रियों के साथ इस वीडियो कांफ्रेंसिंग के बाद लॉकडाउन को खोलने की योजना को लेकर समीक्षा की गई कि चरणबद्ध तरीके से कैसे लागू किया जाए? बताया यह भी जा रहा है कि प्रधानमंत्री ने राज्यों को अपने-अपने राज्यों में लॉकडाउन को खोलने की योजना तैयार करने को कहा है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी ने 24 मार्च को कोरोना-19 के प्रसार को रोकने के लिए एहतियात के तौर पर 21 दिन के लॉकडाउन का ऐलान किया था। बाद में उसे 3 मई तक बढ़ा दिया गया था। लॉकडाउन की घोषणा से पहले वायरस के प्रसार की जांच करने के साधनों पर चर्चा करने के लिए प्रधानमंत्री ने 20 मार्च को मुख्यमंत्रियों के साथ बातचीत की थी।
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