शास्त्रानुसार मनुष्य को भूल से भी निर्वस्त्र होकर नहीं करना चाहिए ये काम

वैसे तो हिन्दू धर्म में बहुत से पुराण और उपनिषद हैं जो हर व्यक्ति को अच्छे मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते है और हमे उचित ढंग से जीवन जीने का तरीका बताते हैं। इन शास्त्रों और पुराणो के अनुसार बताया गया है की इंसान को क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए। विष्णु पुराण जो हिन्दू धर्म का सबसे महत्वूर्ण पुराण माना जाता है के अनुसार कुछ ऐसी बातें बतायी गयी हैं जो हर व्यक्ति को माननी चाहिए।
हम सब देख रहे है की आज के आधुनिक युग में ऐसे बहुत कम ही लोग है जो धर्म, पुराण आदि को उतनी तवज्जो देते है। हर कोई बस एक ही बात पर ज्यादा से ज्यादा ध्यान तरक्की पाने की तरफ लगाते है क्योंकि उनका मानना है की आज के समय मे परेशानियाँ ज्यादा है और आम्दानी के साधन कम। मगर बावजूद इसके आज भी ऐसे कई लोग है जो धर्म-कर्म में भरोसा रखते है। सबसे पहले आपको बता दे की विष्णु पुराण के अनुसार माना गया है की निर्वस्त्र होकर स्नान करना किसी पाप से कम नहीं होता है। ऐसा कहा जाता है की जब भी आप स्नान करें आपके तन पर कपड़े अवश्य होने चाहिए। माना जाता है की निर्वस्त्र होकर नहाने से जल देवता का अपमान होता है।
विष्णु पुराण के अनुसार बताया गया है की व्यक्ति को भुलवश भी निर्वस्त्र होकर नहीं सोना चाहिए। कहा जाता है की निर्वस्त्र होकर सोना, निर्वस्त्र नहाने जितना ही बड़ा पाप होता है। मान्यता है की रात्रि काल में मनुष्य से मिलने के लिए उसके पूर्वज और पितृजन आते हैं और उस वक़्त यदि आपको निर्वस्त्र अवस्था में सोते देख उन्हें बुरा लगेगा और वह आपसे मिले बिना ही चले जायेंगे। निर्वस्त्र सोना स्वास्थ्य के लिए भी कई तरह से हानिकारक बताया गया है।

हिन्दू धर्म में स्नान के बाद अपने हाथों में जल लेकर देवताओं को अर्पित किया जाता है लेकिन आपको बताना चाहेंगे की  निर्वस्त्र होकर जल अर्पित करते है तो हैं तो इससे देवताओं का अपमान होता है, ऐसा करने वाले व्यक्ति के चरित्र की हानि होती है। पुराण के अनुसार बताया गया है की ईश्वर की आराधना करते समय हमेशा बिना सिले हुए कपड़े पहनने चाहिए।

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