ट्रम्प के फंडिंग रोकने पर डब्ल्यूएचओ ने खेद जताया

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के प्रमुख ने बुधवार को कहा कि संयुक्त राष्ट्र स्वास्थ्य एजेंसी की फंडिंग रोकने के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के फैसले पर उन्हें खेद है, लेकिन अब दुनिया को कोरोनावायरस के खिलाफ लड़ाई में एकजुट हो जाने का समय है।
ट्रम्प के इस कदम की दुनिया के कई देशों के नेताओं ने आलोचना की हैं। डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस अदनोम घेब्येयियस ने एक समाचार सम्मेलन में कहा कि अमेरिका "डब्ल्यूएचओ का एक लंबे समय से स्थायी और उदार मित्र रहा है और हमें उम्मीद है कि यह आगे भी जारी रहेगा।"
टेड्रोस ने कहा कि अमेरिकी फंडिंग में किसी भी रोक के डब्ल्यूएचओ के काम पर प्रभाव की समीक्षा उनका संगठन कर रहा है। हम अपने भागीदारों के साथ मिलकर किसी भी कमी को भरने के लिए काम करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि हमारा काम निर्बाध रूप से जारी रहे। डब्ल्यूएचओ ने विशेष रूप से कोरोनावायरस महामारी के खिलाफ अभियान के लिए एक अरब डॉलर से अधिक की सहायता की अपील की है।
बिल गेट्स ने भी इस बारे में एक ट्वीट कर कहा कि "विश्व स्वास्थ्य संगठन का वित्त पोषण रोकना खतरनाक है। दुनिया को अब पहले से कहीं ज्यादा डब्ल्यूएचओ की जरूरत है।"
अमेरिका ने 2019 में डब्ल्यूएचओ को 400 मिलियन डॉलर से अधिक का योगदान दिया थाजो इसके बजट का लगभग 15% है। ट्रंप प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि वाशिंगटन करीब 58 मिलियन डॉलर के योगदान को रोक देगा, जो कि 2020 के लिए देना था।
अमेरिका पारंपरिक रूप से डब्ल्यूएचओ के विशिष्ट कार्यक्रमों से जुड़े स्वैच्छिक वित्त पोषण में हर साल कई सौ मिलियन डॉलर देता है। ट्रम्प प्रशासन के एक दूसरे वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, " अब यह पैसा अन्य भागीदारों के साथ खर्च किया जाएगा।"
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