बिल्डिंग को ब्लास्ट से उड़ाने के पहले नहीं हटाया सामान, मलबे में बर्बाद हो गया 60 लाख का प्लायवुड

न्याय नगर में ब्लास्ट से ध्वस्त की गई जी प्लस थ्री बिल्डिंग तोडऩे को लेकर नगर निगम पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है, निगम ने नोटिस किसी दूसरे नंबर के प्लॉट को लेकर दिया और तोड़ दिया दूसरा। कार्रवाई से पहले बिल्डिंंग मालिक को सामान निकालने तक का मौका नहीं दिया गया, जिससे उनका करीब 60 लाख का प्लायवुड व अन्य सामान मलबे मेें दबकर बर्बाद हो गया। 17 जनवरी को निगम टीम ने न्याय नगर में चार मंजिला मकान ब्लास्ट कर गिराया था।
निगम अफसरों ने बताया, 378 न्याय नगर सेक्टर बी में बाबूलाल गौड़ के मकान पर रिमूवल की कार्रवाई की। सरकारी जमीन पर यह बिल्डिंग बिना नक्शा पास किए बनाई जा रही थी। बिल्डिंग मालिक कपिल गौड़ व उनके भाई कमल गौड़ ने निगम पर गलत कार्रवाई करने का आरोप लगाया है। अब वे कोर्ट की शरण लेने वाले हैं। कपिल के मुताबिक उन्होंने 331-332 पर भवन बनाया था। हालांकि यह भवन बिना नक्शा पास कराए बनाया गया था। कपिल की प्लायवुड की एजेंसी है।
उन्होंने बिल्डिंग के अलग-अलग फ्लोर पर प्लायवुड रखे हुए थे। निगम ने प्लॉट नंबर 378 की बिल्डिंग तोडऩे का नोटिस जारी किया था। इस संबंध में भवन अधिकारी ने उनसे कहा था, गलत पते का नोटिस आ गया है तो कोई खास बात नहीं है। इसके बाद नोटिस को गंभीरता से नहीं लिया। 17 जनवरी को निगम टीम ने सुबह 15 जनवरी की तारीख का नोटिस चस्पा कर दिया और आधे घंटे बाद कार्रवाई शुरू कर दी। कपिल का आरोप है, मौके पर मौजूद अपर आयुक्त संदीप सोनी व रिमूवल अधिकारी महेंद्रसिंह चौहान को गलत नंबर के प्लॉट पर कार्रवाई करने की जानकारी दी, लेकिन उन्होंने ध्यान नहीं दिया। कमिश्नर से भी आग्रह किया पर सुनवाई नहीं हुई। बिल्डिंग में रखा सामान हटाने के लिए समय मांंगा, लेकिन अफसर तैयार नहीं हुए और बिल्डिंग को ब्लास्ट कर दिया। बिल्डिंग गिरने से अंदर रखा करीब 60 लाख रुपए का प्लायवुड व अन्य सामान दबकर लगभग नष्ट हो गया। मलबे में प्लायवुड नजर भी आ रहे हैं।
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