2 किमी नदी किनारे पैदल चले अधिकारी, बासौदा की तरफ से भी घेरा तब जाकर मिली पनडुब्बी

रेत के अवैध खनन में लगी एक पनडुब्बी को ढूंढने और उसे नष्ट कराने में नटेरन और गंजबासौदा तहसील की टीम को खासी मशक्कत करना पड़ी। तहसीलदार समेत खनिज और पुलिस की टीम जहां नटेरन की ओर से नदी के किनारे-किनारे ऊबड़-खाबड़ में से कूदते-फांदते किसी तरह मौके पर पहुंची, वहीं गंजबासौदा की टीम भी नायब तहसीलदार के नेतृत्व में नाव लेकर पहुंच गई ताकि रेत माफिया पनडुब्बी को लेकर भाग न सके।
नटेरन तहसीलदार हर्ष विक्रम सिंह ने बताया कि कई दिनों से शिकायत मिल रही थी कि बेतवा-सगड़ नदियों के संगम पर रेत का अवैध खनन चल रहा है। मंगलवार की दोपहर करीब 1.30 बजे वे अपनी राजस्व टीम, खनिज विभाग और पुलिस की टीम के साथ मौके पर पहुंचे, लेकिन जहां बताया गया था, वहां रेत, पनडुब्बी और रेत निकालने के कोई उपकरण नहीं मिले। फिर संयुक्त टीम नदी किनारे-किनारे करीब 2 किमी तक पैदल पहुंचे तो मढिय़ा गांव के पास पनडुब्बी छिपी हुई मिली। 

यहां रेत निकालने की पूरी व्यवस्था थी। तहसीलदार सिंह ने बताया कि रेत खननकर्ता पनडुब्बी लेकर भाग न सके, इसलिए गंजबासौदा तहसील को भी खबर की गई थी, क्योंकि इस मढिय़ा गांव का दूसरा सिरा नदी के दूसरी ओर चौरावर गांव से मिलता है, जो गंजबासौदा तहसील में आता है। सूचना पर गंजबासौदा से नायब तहसीलदार सुनील गढ़वाल अपनी टीम और नाव लेकर आ पहुंचे थे। उन्हें भी नदी किनारे चलना पड़ा। तब कहीं जाकर पनडुब्बी को पकड़ा जा सका।

तहसीलदार के अनुसार पनडुब्बी किसी यादव की बताई गई है, लेकिन रेत खनन का काम मढिय़ा के धर्मेन्द्र कुशवाह द्वारा किया जाता है। नटेरन के मढिय़ा गांव के साथ ही गंजबासौदा के चौरावर गांव में भी खननकर्ता ने ठीया बना रखा था और सुविधानुसार दोनों जगह से रेत निकालता था। इस कार्रवाई के बाद जब पनडुब्बी को लाना संभव नहीं हो सका तो खनिज विभाग को निर्देश देकर पनडुब्बी नष्ट करा दी गई।
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