मधु को मेहनत का फल मिला और बीते महीने आए UPSC के नतीजों में उसने सफलता हासिल की. कहानी का सार यह है कि मेहनत करने वालों की कभी हार नहीं होती. अब हम आपको महाराष्ट्र की एक ऐसी ही मेहनतकश महिला से मिलवाने जा रहे हैं जो समाज खासकर महिला वर्ग के लिए एक मिसाल हैं. दरअसल, महाराष्ट्र के औरंगाबाद की रहने वाली सविता डकले एक किसान हैं. उन्होंने किसानी करते हुए अपनी बेटी से अंग्रेजी सीखी और 10वीं की परीक्षा दी. 

एक वेबसाइट की रिपोर्ट के मुताबिक, सविता के घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी. पांच भाई बहनों में सविता तीसरे नंबर की संतान थीं. पिता एक फैक्ट्री में मजदूरी करते और मां सब्जी बेचती थीं. घर की खराब आर्थिक स्थिती के चलते उन्होंने 9वीं के बाद फैक्ट्री में काम करने लगीं. वह 10वीं बोर्ड की परीक्षा नहीं दे सकीं और पढ़-लिखकर आगे बढ़ने का उनका सपना अधूरा ही रह गया. 

17-18 साल की उम्र में औरंगाबाद के ही एक किसान परिवार में सविता की शादी करा दी गई. सविता भी किसानी करने लगीं. फिर किसी दिन गांव में महिलाओं को सशक्त बनने में मदद करने वाली एक संस्था आई सविता इस संस्था के संपर्क में आईं. इसके बाद संस्था की मदद से सविता अलग-अलग कार्यक्रमों में हिस्सा लेकर लोगों को खेती के गुर सिखाने लगीं. 

सविता के दो बच्चे हैं. दोनों अंग्रेजी मीडियम में पढ़ते हैं. खेती से बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च निकालना मुश्किल हो रहा था तो सविता ने दूसरों की खेतों में मजदूरी भी करनी शुरू कर दी. गांव की महिलाओं के लिए प्रेरणा बनीं सविता ने पिछली बाक 10वीं की परीक्षा दी लेकिन वह अंग्रेजी में फेल हो गईं. इसके बाद उन्होंने अपनी बेटी से अंग्रेजी सीखी और इस साल फिर से अंग्रेजी की परीक्षा दी है. पास होने के बाद वह आगे की पढ़ाई जारी रखेंगी.