ऐसा इसलिए कि कटनी जंक्शन में इंजन बदलने में समय नहीं लगे। यात्रियों ने बताया कि सारनाथ एक्सप्रेस का कटनी जंक्शन में बीस मिनट का स्टॉपेज है, लेकिन महीने में ज्यादातर दिनों में यह गाड़ी 30 से 40 मिनट बाद ही छूटती है। कई बार तो एक घंटे तक ट्रेन स्टेशन पर ही खड़ी रहती है। 4 फरवरी को ही यह गाड़ी 9.35 बजे कटनी पहुंचकर 42 मिनट बाद रात 10.17 बजे छूटी। कटनी से छूटने के बाद भी यह गाड़ी न्यू कटनी जंक्शन (एनकेजे) यार्ड में खड़ी रहती है। यात्रियों ने बताया कि ट्रेन के लेट होने से कटनी से गंतव्य जाने वाले यात्रियों को परेशानी होती है।

स्टेशन में परिचालन देख रहे अधिकारी व इंजन बदलने वाले कर्मचारियों की माने तो सारनाथ के कटनी पहुंचने के समय पर ही 12142 पटना-मुंबई सुपरफास्ट यहां पहुंचती है। इस गाड़ी का इंजन बदलकर जल्दी छोडऩे के निर्देश होते हैं। इस कारण स्टेशन पर दूसरी ट्रेनों को पॉसिंग नहीं मिलती है। पश्चिम मध्य रेल जबलपुर जोन सीपीआरओ पिय्रंका दीक्षित का कहना है कि कटनी मेंं इंजन बदलने वाले ट्रेनों में दस मिनट से ज्यादा समय नहीं लगे इसके लिए कई गाडिय़ों को दो इंजन के साथ चलाई जा रही है। सारनाथ व दूसरी गाडिय़ों को समय पर छोडऩे में कई बार अन्य गाडिय़ों की पॉसिंग के कारण विलंब होता है। कोशिश है कि समस्या का समाधान जल्द निकालकर यात्री ट्रेनों को समय पर रवाना किया जाए।